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शिमला में ‘चिट्टा मुक्ति वॉकथन’ में उमड़ी भारी भीड़, सीएम सुक्खू ने खुद किया पैदल मार्च

शिमला में ‘चिट्टा मुक्ति वॉकथन’ में हज़ारों लोगों की भागीदारी
सीएम सुक्खू ने हरी झंडी दिखाकर खुद भी विधानसभा तक पैदल मार्च किया
तस्करों को चेतावनी—चिट्टा कारोबार छोड़ दो, नहीं तो जेल के लिए तैयार रहो


हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ शनिवार को बड़ा जनआंदोलन शुरू हुआ, जब शिमला के रिज मैदान पर ‘चिट्टा मुक्ति वॉकथन’ में हज़ारों लोग उमड़ पड़े। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य स्तरीय वॉकथन को हरी झंडी दिखाते हुए मौजूद छात्रों और शहरवासियों को नशा न करने की सामूहिक शपथ दिलाई। रिज का मैदान पूरी तरह खचाखच भरा रहा और माहौल नशा-मुक्त हिमाचल के संकल्प से गूंज उठा। हरी झंडी दिखाने के बाद सीएम सुक्खू खुद भी विशाल जनसमूह के साथ रिज से विधानसभा तक पैदल चले, जहां लोग “चिट्टा छोड़ो, जीवन अपनाओ” के नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। प्रदेश सरकार इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ जिलों तक ले जाने की तैयारी कर रही है।

शिमला के रिज से विधानसभा के लिए 'चिट्टा मुक्ति वॉकथन' में शामिल सीएम सुक्खू व अन्य।

सीएम सुक्खू ने साफ कहा कि चिट्टा परिवारों को खोखला कर रहा है और इसे मिटाना बेहद जरूरी है, इसलिए जनता की भागीदारी सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने चिट्टा माफिया को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि “कारोबार छोड़ दो, नहीं तो जेल जाने को तैयार रहो।” इसी बीच सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 1140 एनडीपीएस मामलों में 1803 तस्कर गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने इस दौरान 919 किलो चरस, 32.9 किलो हेरोइन, 1632 किलो पोपी हस्क, 89.6 किलो अफीम और लाखों नशे की कैप्सूल-टैबलेट्स बरामद की हैं। इसी अवधि में 69.76 लाख भांग के पौधे नष्ट किए गए, जिससे पहाड़ी इलाकों में इसके फैलाव की गंभीरता उजागर होती है।

रिज से विधानसभा के लिए 'चिट्टा मुक्ति वॉकथन' में शामिल शहरवासी।

सरकार ने नशा नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन साल में 35.95 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं, जिनमें 2023 में 4.87 करोड़, 2024 में 24.42 करोड़ और 2025 में 6.66 करोड़ की संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा 7.74 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्की की पुष्टि के लिए भेजा जा चुका है, जबकि पुलिस ने 1214 संपत्तियों को चिह्नित किया है। प्रदेश में नशा तस्करी के बढ़ते नेटवर्क और युवाओं की गिरफ्त ने इस अभियान की आवश्यकता को और तीव्र बना दिया है।

रिज पर 'चिट्टा मुक्ति वॉकथन' में शामिल होने को जुटी भीड़।

सरकार अब नशा उन्मूलन के साथ उपचार और पुनर्वास पर भी फोकस कर रही है। वर्तमान में कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के चार नशा निवारण केंद्र, और कुल्लू में महिलाओं के लिए एक केंद्र संचालित हैं। अब सभी जिलों में जिला-स्तरीय नशा निवारण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। सिरमौर के कोटला बड़ोंग में 100 बिस्तरों वाला आधुनिक नशा मुक्ति केंद्र निर्माणाधीन है, जो प्रदेश में उपचार क्षमता को और मजबूत करेगा।