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हरोली में जल संरक्षण की नई मिसाल: 20 करोड़ की लागत से प्राचीन टोबों का कायाकल्प

➤ हरोली क्षेत्र में पुराने तालाबों को आधुनिक सरोवरों में बदला जा रहा
➤ जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज पर 20 करोड़ रुपये खर्च
➤ पूरे प्रदेश के लिए बन रहा प्रेरक मॉडल


ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए एक अनुकरणीय पहल की जा रही है। क्षेत्र के प्राचीन तालाबों यानी टोबों को पुनर्जीवित कर उन्हें आधुनिक, सुंदर और बहुउद्देशीय सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है।

यह पहल न केवल पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है। हरोली क्षेत्र के गांवों में फैले पारंपरिक टोबे कभी वर्षा जल संग्रहण, पशुओं के पेयजल और सिंचाई का प्रमुख साधन थे। समय के साथ ये उपेक्षित हो गए थे। अब इन्हें आधुनिक तकनीक से दोबारा जल से लबालब किया जा रहा है और आकर्षक सरोवरों में बदला जा रहा है।

इन सरोवरों से जल संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता, जलीय जीवन, ग्रामीण पर्यटन और पंचायतों की आय के नए रास्ते भी खुलेंगे। हरोली में तालाब संरक्षण का यह कार्य वर्षों से जारी है, लेकिन अब इसे और व्यापक रूप दिया गया है। तालाबों के चारों ओर पैदल पथ, हरियाली, सौंदर्यीकरण और स्वच्छता से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा।

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल विकास का कार्य नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने का संकल्प है। पुनर्जीवित टोबे भूजल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण समृद्धि में अहम भूमिका निभाएंगे।

जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशाषी अभियंता पुनीत शर्मा ने बताया कि यह कार्य जल शक्ति, वन और लोक निर्माण विभाग के संयुक्त कन्वर्जेंस से किया जा रहा है। जल शक्ति विभाग की ओर से करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि अन्य विभागों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से लगाई जा रही है।