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शिवरात्रि महोत्सव में इस बार और भव्य होगी सांस्कृतिक परेड, 13 देशों की संस्‍कृति की दिखेगी झलक

20 फरवरी को निकलेगी भव्य सांस्कृतिक परेड, 33 दल लेंगे भाग
13 देशों, छह राज्यों और हिमाचल के छह जिलों की सहभागिता
बड़ा देव कमरूनाग के आगमन से महाशिवरात्रि के कारज शुरू


छोटी काशी मंडी में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव इस बार और भी भव्य रूप में नजर आएगा। बीते वर्ष पहली बार आयोजित की गई सांस्कृतिक परेड को इस बार भी दोहराया जा रहा है। मंडी जिला प्रशासन ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं और 20 फरवरी को यह भव्य परेड शहर की सड़कों पर विश्व संस्कृति की झलक बिखेरेगी। इस बार कुल 33 सांस्कृतिक दल भाग लेंगे, जिनमें 13 देश, छह राज्य और हिमाचल प्रदेश के छह जिलों के दल शामिल हैं।

डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने जानकारी देते हुए बताया कि सांस्कृतिक परेड की शुरुआत डीसी कार्यालय परिसर से होगी। यह परेड सेरी मंच से होते हुए इंदिरा मार्केट परिसर का परिभ्रमण करेगी। इस आयोजन का उद्देश्य शिवरात्रि महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को और अधिक सशक्त बनाना है, ताकि स्थानीय लोगों को विभिन्न देशों और प्रदेशों की समृद्ध संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, फ्रांस, तजाकिस्तान, अर्जेंटीना, जिम्बाब्वे, तंजानिया, नाइजीरिया, घाना, बोलीविया, नेपाल, भूटान और श्रीलंका से दल आमंत्रित किए गए हैं। इसके अलावा राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, असम और मणिपुर के सांस्कृतिक दल भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। हिमाचल प्रदेश के शिमला, हमीरपुर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, चंबा और किन्नौर जिलों के साथ-साथ मंडी जिले के पांच स्थानीय दल भी इस परेड की शोभा बढ़ाएंगे।

सांस्कृतिक परेड में गतका दल, गृहरक्षक बैंड और विभिन्न विषयों पर आधारित आकर्षक झांकियां भी शामिल होंगी। यह परेड न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होगी बल्कि पर्यटन और सामाजिक समरसता को भी नया आयाम देगी।

उधर, बड़ा देव कमरूनाग के मंडी पहुंचते ही अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के धार्मिक कारज विधिवत शुरू हो गए। शनिवार दोपहर को देवता के शहर में प्रवेश पर पुलघराट में प्रशासन और सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने उनका स्वागत किया। बड़ा देव ने सबसे पहले राज देवता माधो राय के मंदिर में हाजिरी भरी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत राजमहल पहुंचे, जहां राजा ओमेश्वर सेन ने उनका अभिनंदन किया।

इसके बाद देव कमरूनाग लाव-लश्कर सहित टारना की पहाड़ी स्थित माता श्यामा काली मंदिर परिसर में विराजमान हो गए, जहां वे सात दिनों तक रहेंगे। इस दौरान भक्तों का तांता लगा रहेगा। खास बात यह है कि इस बार समापन के अवसर पर देवता सेरी चानणी पर भी कुछ देर रुकेंगे, जो पिछले कुछ वर्षों से बंद परंपरा थी।

नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा और आयुक्त रोहित राठौर ने भी विस्को रिजार्ट पहुंचकर बड़ा देव कमरूनाग का स्वागत किया। महापौर ने इसे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक बताया। आयुक्त द्वारा देवता के बैठने वाले स्थल के सौंदर्यीकरण का आग्रह भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसके बाद नगर निगम इस दिशा में कार्य करेगा।