➤ शिलाई में अवैध पेड़ कटान को लेकर BJP विधायकों का प्रदर्शन
➤ 300 से ज्यादा पेड़ काटने का आरोप, वन माफिया सक्रिय होने का दावा
➤ आउटसोर्स कर्मचारियों, डॉक्टरों की कमी और MTS मुद्दों पर सदन में गरमाएगी बहस
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया। विधानसभा परिसर के बाहर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न मुद्दों को लेकर आक्रोश जताया।
बीजेपी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन रैली निकाली और सरकार पर वन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में केवल 25 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर 300 से ज्यादा पेड़ों को काटकर जमींदोज कर दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि निजी भूमि पर इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति कैसे दी गई।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में एक कांग्रेस नेता की भूमिका सामने आ रही है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे पर्यावरण और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया है।
उधर, विधानसभा के अंदर भी कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस होने के संकेत हैं। खासतौर पर आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा आज सदन में गूंजने वाला है। प्रदेश में करीब 25 हजार से अधिक कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं, जिनमें से कई 10 से 15 साल से सेवा दे रहे हैं, लेकिन उनका भविष्य अब भी अनिश्चित बना हुआ है।
मंडी जिले के करसोग से बीजेपी विधायक दीपराज ने इस मुद्दे को सदन में उठाने की तैयारी की है। कर्मचारियों को महज 10 से 15 हजार रुपए मासिक मानदेय पर काम करना पड़ रहा है, जबकि वे नियमित कर्मचारियों से भी अधिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इस स्थिति को लेकर सदन में तीखी बहस की संभावना है और सबकी नजरें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाब पर टिकी हैं।
इसके अलावा, राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पदों का मुद्दा भी उठेगा। सुंदरनगर से बीजेपी विधायक राकेश जम्वाल ने इस पर सवाल पूछा है, जिसमें प्रशिक्षित बेरोजगार डॉक्टरों की संख्या और भर्ती प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा गया है।
इसी कड़ी में, पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत मल्टी टास्क वर्करों (MTS) का मामला भी चर्चा में रहेगा। ऊना से विधायक सत्तपाल सत्ती ने इन कर्मचारियों के मानदेय बढ़ाने और कार्य-घंटे कम करने की मांग उठाई है। वर्तमान में कई MTS कर्मचारियों को केवल 5500 रुपए मासिक पर काम करना पड़ रहा है।
सत्र के दौरान अनुपूरक बजट 2025-26 को पारित किया जाना है, जबकि प्रश्नकाल के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा जारी रहेगी। ऐसे में साफ है कि विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक माहौल गर्म रहने वाला है।



