➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने पूर्व सीपीएस के सरकारी आवास खाली न करने पर जताई नाराजगी
➤ कोर्ट ने बिना लाइसेंस शुल्क दिए सरकारी आवास इस्तेमाल करने पर उठाए सवाल
➤ 25 जून को होगी अगली सुनवाई, सरकार से मांगा रिकॉर्ड
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं करने पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश Gurmeet Singh Sandhawalia और न्यायाधीश Bipin Chander Negi की खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार और पूर्व सीपीएस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अदालत में दायर हलफनामे से खुलासा हुआ है कि छह पूर्व सीपीएस अभी भी सरकारी आवासों का उपयोग कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी पाया कि ये नेता न तो आवासों का लाइसेंस शुल्क जमा कर रहे हैं और न ही विधानसभा सचिवालय उनके वेतन से इसकी कटौती कर रहा है।
खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व सीपीएस अपनी वर्तमान पात्रता से कहीं अधिक बड़े और बेहतर सरकारी आवासों का लाभ उठा रहे हैं, जो कानून के खिलाफ है। अदालत ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जताई।
सरकार की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित स्पेशल लीव पिटीशन के अंतिम फैसले तक इन नेताओं को आवास में रहने की अनुमति दी गई है। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल अयोग्यता और फैसले के एक विशेष पैरा पर रोक लगाई है, न कि सरकारी सुविधाओं के इस्तेमाल पर।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार ने अब तक इन आवासों का आवंटन रद्द करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने 6 जून 2025 के उस निर्णय को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा है, जिसके तहत इन नेताओं को आवास में रहने की अनुमति दी गई थी।
कोर्ट ने न्यायाधीशों के लिए सरकारी आवास उपलब्ध न होने के मुद्दे पर भी सख्त रुख बनाए रखा। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के समीप स्थित ये आवास उन न्यायाधीशों को दिए जा सकते हैं, जिन्हें लंबी दूरी तय कर अदालत पहुंचना पड़ता है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त छह सीपीएस को हटाने के आदेश दिए थे। अदालत ने उनकी नियुक्तियों को असंवैधानिक करार देते हुए 2006 के सीपीएस एक्ट को भी निरस्त कर दिया था। साथ ही सरकारी गाड़ी, बंगला, वेतन और स्टाफ जैसी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस लेने के निर्देश दिए गए थे। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।



