➤ नगर निगम और पंचायती राज चुनावों के लिए कांग्रेस ने बनाया वॉर रूम
➤ हरि कृष्ण हिमराल को सौंपी गई वॉर रूम की जिम्मेदारी
➤ सोशल मीडिया और लीगल सेल के लिए भी अलग टीमें गठित
हिमाचल प्रदेश में आगामी नगर निगम (MC) और पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों को धार देने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपना संगठनात्मक ढांचा मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव प्रबंधन के लिए विशेष वॉर रूम का गठन करते हुए विभिन्न पदाधिकारियों की नियुक्तियों की घोषणा की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना में कई नेताओं और पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस संबंध में महासचिव (संगठन) विनोद जिंटा की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई।
कांग्रेस पार्टी ने वॉर रूम की कमान हरि कृष्ण हिमराल को सौंपी है। उन्हें वॉर रूम का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। वहीं, यशपाल तनाइक को सह-इंचार्ज और रिपना कलसैक को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने चुनावी गतिविधियों के बेहतर समन्वय के लिए अलग समन्वय टीम भी गठित की है।
वॉर रूम समन्वय के लिए कैप्टन एस.के. सहगल को समन्वयक बनाया गया है। इसके अलावा नीरज बख्शी, उषा मेहता और संजीता चौहान को सह-समन्वयक के रूप में शामिल किया गया है। पार्टी का मानना है कि इन नियुक्तियों से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी और चुनावी गतिविधियों में बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
कांग्रेस ने चुनावों के दौरान कानूनी मामलों और चुनाव आयोग से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए अलग से वॉर रूम लीगल सेल का भी गठन किया है। इस सेल में एडवोकेट नरेश वर्मा, यशवीर सिंह राठौर और दीपक सुंफा को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही पार्टी ने डिजिटल और सोशल मीडिया क्षेत्र में भी अपनी सक्रियता बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। सोशल मीडिया टीम में अदित्य ढींढोरा, अक्षित नंदा और पारुल राठौर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से चुनावी प्रचार को मजबूत करना और युवाओं तक प्रभावी पहुंच बनाना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अभी से संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर विपक्ष पर बढ़त बनाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में अन्य राजनीतिक दल भी अपनी चुनावी रणनीति को और तेज कर सकते हैं।



