➤ ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में शिमला सहित हिमाचल के निजी मेडिकल स्टोर बंद
➤ सरकारी दवा केंद्रों और जन औषधि स्टोर पर सुबह से उमड़ी लोगों की भारी भीड़
➤ केमिस्ट्स बोले- ई-फार्मेसी से छोटे कारोबार और मरीजों की सुरक्षा दोनों पर खतरा
शिमला में बुधवार को दवा खरीदने पहुंचे लोगों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब शहर के अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद मिले। All India Organisation of Chemists and Druggists के आह्वान पर हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल की गई, जिसके चलते शिमला के निजी मेडिकल स्टोरों ने भी अपने शटर डाउन रखे। इस हड़ताल का असर राजधानी शिमला में साफ तौर पर देखने को मिला, जहां मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयों के लिए सरकारी केंद्रों का रुख करना पड़ा।
निजी मेडिकल स्टोर बंद होने के बाद शहर के जन औषधि केंद्रों, सरकारी अस्पतालों के भीतर संचालित दवा दुकानों और सरकारी डिस्पेंसरियों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। कई स्थानों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मरीजों के परिजन जरूरी दवाइयों के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकते नजर आए। खासतौर पर बुजुर्ग मरीजों और नियमित दवा लेने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।
हड़ताल कर रहे केमिस्ट्स का कहना है कि तेजी से बढ़ रही ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों के कारोबार पर गंभीर असर डाल रहे हैं। उनका आरोप है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उनका कहना है कि कई बार बिना सही प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
हिमाचल प्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट संगठन के अध्यक्ष संजीव पंडित ने कहा कि यह विरोध केवल कारोबार बचाने के लिए नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों केमिस्ट और ड्रगिस्ट इस आंदोलन में शामिल हुए हैं और सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि हड़ताल के दौरान इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया। अस्पतालों से जुड़ी आवश्यक दवा सेवाएं और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं चालू रखी गईं ताकि किसी मरीज को आपात स्थिति में परेशानी न झेलनी पड़े। इसके बावजूद शहर में दवाइयों की खरीद को लेकर दिनभर अफरा-तफरी जैसा माहौल बना रहा।
शिमला में कई लोगों ने यह भी कहा कि ऑनलाइन दवा सेवाएं सुविधा जरूर देती हैं, लेकिन स्थानीय मेडिकल स्टोर बंद होने से आम लोगों को तत्काल दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार को दोनों व्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि मरीजों और छोटे कारोबारियों दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
वहीं, सोलन में बुधवार को केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गेनाइजेशन के आह्वान पर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल देखने को मिली। देशभर में ऑनलाइन दवा बुकिंग और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन के तहत सोलन के अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे। इस हड़ताल का असर शहर में दवाइयों की खरीद पर भी देखने को मिला, जहां कई लोगों को दवाइयों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ा।
हड़ताल के दौरान सोलन केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए डीसी मनमोहन शर्मा को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण और छोटे मेडिकल कारोबारियों के हितों की सुरक्षा की मांग उठाई।
संगठन के प्रधान वीरेंद्र सूद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री तेजी से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के कारोबार को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त निगरानी के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है। कई बार बिना डॉक्टर की सही सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे गलत दवाओं के इस्तेमाल का जोखिम बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर केवल व्यापार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मरीजों को सही दवा और उचित सलाह उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। छोटे शहरों और कस्बों में स्थानीय केमिस्ट लोगों के स्वास्थ्य तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के अनियंत्रित विस्तार से हजारों छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
सोलन में दिनभर मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं और अस्पतालों से जुड़ी आवश्यक दवा सुविधाओं को चालू रखा गया ताकि गंभीर मरीजों को दिक्कत न हो।
देशभर में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन में लाखों केमिस्ट और ड्रगिस्ट शामिल बताए जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले समय में आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है।



