➤ हिमाचल पंचायत चुनाव में 10,854 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए
➤ शिमला सबसे आगे, 42 पंचायतों में बिना मतदान चुनी गई पूरी पंचायतें
➤ 85 बीडीसी, 176 प्रधान और 286 उप प्रधान बिना वोटिंग बने विजेता
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के तहत नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेशभर में कुल 10 हजार 854 उम्मीदवार बिना मुकाबले के विजेता घोषित किए गए हैं। इनमें पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, उप प्रधान और वार्ड सदस्य शामिल हैं।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 85 बीडीसी सदस्य, 176 पंचायत प्रधान, 286 उप प्रधान और 10 हजार 307 वार्ड सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं। इसके अलावा राज्य की 131 ग्राम पंचायतों में प्रधान, उप प्रधान और सभी वार्ड सदस्य बिना मतदान के चुने गए हैं। ऐसे में इन पंचायतों में अब 26, 28 और 30 मई को मतदान नहीं होगा।
इस बार पंचायत चुनावों में शिमला जिला सबसे आगे रहा है। यहां 42 ग्राम पंचायतें पूरी तरह निर्विरोध चुनी गई हैं। शिमला में 21 पंचायत समिति सदस्य, 51 प्रधान, 87 उप प्रधान और 1,687 वार्ड सदस्य बिना मुकाबले के निर्वाचित हुए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इसे बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि कई पंचायतों में उम्मीदवारों के बीच सहमति बनने के कारण मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ी।
कांगड़ा जिला भी निर्विरोध चुनावों में पीछे नहीं रहा। यहां 1,657 वार्ड सदस्य और 10 प्रधान निर्विरोध चुने गए हैं। कुल्लू में 1,296 वार्ड सदस्य और 9 प्रधान, जबकि सिरमौर में 1,166 वार्ड सदस्य और 32 प्रधान बिना मुकाबले के निर्वाचित हुए हैं। सोलन में 1,121 वार्ड सदस्य और 14 प्रधान निर्विरोध चुने गए हैं।
इसके अलावा बिलासपुर में 420 वार्ड सदस्य और 3 प्रधान, चंबा में 400 वार्ड सदस्य और 4 प्रधान, हमीरपुर में 582 वार्ड सदस्य, किन्नौर में 262 वार्ड सदस्य और 22 प्रधान, लाहौल-स्पीति में 809 वार्ड सदस्य, मंडी में 206 वार्ड सदस्य और 17 प्रधान तथा ऊना में 706 वार्ड सदस्य और 8 प्रधान निर्विरोध चुने गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि जिन सीटों पर मुकाबला बना हुआ है, वहां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी। वहीं जिन पंचायतों में सभी पदों पर निर्विरोध चुनाव हो गया है, वहां मतदान नहीं कराया जाएगा।
पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। इसे गांवों में आपसी सहमति, सामाजिक संतुलन और चुनावी खर्च कम होने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि कुछ राजनीतिक जानकार इसे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समझौते और रणनीति का हिस्सा भी मान रहे हैं।
प्रदेश में अब बाकी सीटों पर होने वाले मतदान को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने सभी जिलों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।



