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हिमाचल में गृह जिले में तैनाती की मांग खारिज, शिक्षा विभाग का सख्‍तआदेश

शिक्षा विभाग ने तबादला नीति पर अपनाया सख्त रुख, गृह जिले में बने रहने की मांग ठुकराई
हाईकोर्ट के निर्देश पर सुनवाई के बाद टीजीटी मेडिकल शिक्षिका का प्रतिवेदन खारिज
निदेशालय बोला- पसंदीदा स्थान पर तैनाती कर्मचारी का अधिकार नहीं, जनहित सर्वोपरि


शिमला। हिमाचल प्रदेश में तबादलों को लेकर जारी खींचतान के बीच स्कूल शिक्षा निदेशालय ने बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। विभाग ने कहा है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान या अपने गृह जिले में तैनाती को अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकता। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर सुनवाई के बाद निदेशालय ने मंडी जिले की एक टीजीटी मेडिकल शिक्षिका की समायोजन संबंधी मांग को खारिज कर दिया है। विभाग के इस फैसले को भविष्य के तबादला मामलों के लिए भी अहम माना जा रहा है।

मामला मंडी जिले के निहरी शिक्षा खंड के एक स्कूल से जुड़ा है। शिक्षिका ने अपने तबादले और समायोजन को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उनके प्रतिवेदन पर नियमानुसार विचार करते हुए आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा निदेशालय ने 18 जून को शिक्षिका को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया।

सुनवाई के दौरान शिक्षिका ने अपने गृह जिला मंडी में लंबे समय तक समायोजन बनाए रखने की मांग रखी। विभाग ने मामले की समीक्षा के दौरान पाया कि शिक्षिका पहले से ही अपने गृह जिले में कार्यरत हैं और जिस विद्यालय में उनकी नियुक्ति है, वह सुगम क्षेत्र की श्रेणी में आता है।

निदेशालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार की व्यापक तबादला नीति-2013 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर तैनाती या वहीं बने रहने का अधिकार प्राप्त नहीं है। नीति के अनुसार प्रशासनिक आवश्यकता, जनहित और विभागीय जरूरतों के आधार पर सरकार किसी भी कर्मचारी का प्रदेश के किसी भी हिस्से में तबादला या नियुक्ति कर सकती है।

विभाग ने उपलब्ध रिकॉर्ड, सेवा स्थिति और नीति प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षिका के समायोजन या तबादले की मांग विचार योग्य नहीं पाई गई। इसी आधार पर उनके प्रतिवेदन को अस्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया गया।

विभागीय सूत्रों का मानना है कि यह आदेश ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी तबादलों और समायोजन को लेकर अदालतों तथा विभागीय अधिकारियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं। ऐसे में शिक्षा निदेशालय का यह फैसला भविष्य में आने वाले समान मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तबादला सरकारी सेवा की सामान्य शर्त है और व्यक्तिगत सुविधा या पसंद के आधार पर मनचाही तैनाती की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।