➤ रामपुर के ननखड़ी में बागवानों ने सी ग्रेड सेब नाले में फेंके, वीडियो वायरल
➤ एचपीएमसी द्वारा खरीद केंद्र न खोलने से बागवान नाराज़
➤ सरकार ने इस साल सी ग्रेड सेब का खरीद मूल्य 12 रुपये प्रति किलो तय किया है
हिमाचल प्रदेश के रामपुर उपमंडल के ननखड़ी क्षेत्र से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां बागवानों ने अपने मेहनत के पसीने से उगाए गए सी ग्रेड सेब को मजबूरी में नाले में फेंक दिया। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत अड्डू के शीला गांव के बागवान देव राज, रमेश, रमेश ठाकुर और अमित ने यह कदम उठाया। उनका आरोप है कि सरकारी उपक्रम एचपीएमसी (हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉर्पोरेशन) इस सीजन में सी ग्रेड सेब की खरीद नहीं कर रहा। लंबे समय से बागवान खरीद केंद्र खोलने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी फसल का वाजिब मूल्य मिल सके।
ग्राम पंचायत अड्डू के प्रधान पिंकू खंड ने भी सरकार और एचपीएमसी को चेतावनी दी है कि यदि जल्द खरीद केंद्र नहीं खोले गए तो बागवान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इस बार बागवान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और भारी बारिश की मार झेल रहे हैं। बंद सड़कों के कारण सेब मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा और बागवानों ने तोड़ान रोक दिया है।

इस साल सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सी ग्रेड सेब का खरीद मूल्य 12 रुपये प्रति किलो तय किया है। लेकिन खरीद केंद्र न खुलने और बंद सड़कों के चलते फसल बर्बाद हो रही है।
वहीं, जरोल टिक्कर प्लांट के प्रबंधक विजय का कहना है कि सड़कों के बाधित होने से अड्डू, कुंगल बाल्टी, ननखड़ी, पनैल, शीलबाग और गाहन से सेब नहीं उठाए जा सके। उन्होंने बागवानों से अपील की है कि वे अपनी सेब की बोरियां खोलीघाट, टुटू पानी और टिक्कर जैसे खरीद केंद्रों तक पहुंचाएं, ताकि उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
यह मामला सरकार और एचपीएमसी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि लाखों की फसल यूं ही बर्बाद हो रही है और बागवान मजबूरी में अपना सोना जैसे फल नालों में फेंकने को विवश हैं।



