➤ हाईकोर्ट ने आशा वर्करों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक हटाई
➤ सरकार के 2 मई के आदेश पर रोक, राज्य से मांगा जवाब
➤ 7 मई से नामांकन शुरू, अब आशा वर्कर भी लड़ सकेंगी चुनाव
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव से ठीक पहले हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आशा वर्करों को राहत दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें चुनाव लड़ने से रोका गया था।
जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बेंच ने सात याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि आशा वर्कर पार्ट-टाइम कार्यकर्ता हैं, न कि सिविल पोस्ट पर नियुक्त कर्मचारी। उनकी सेवाएं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ली जाती हैं और उन्हें वेतन नहीं बल्कि मानदेय दिया जाता है।
कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए आशा वर्करों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
प्रदेश में 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में 3758 पंचायतों के चुनाव होने हैं। इसके लिए 7 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। अब इस फैसले के बाद आशा वर्कर भी प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के चुनाव लड़ सकेंगी।
प्रदेश में करीब 20 हजार आशा वर्कर कार्यरत हैं, जिन्हें सरकारी खजाने से मानदेय दिया जाता है। इसी आधार पर सरकार ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले से चुनावी मैदान में नए समीकरण बन सकते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में आशा वर्कर भी चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी।



