➤ शिमला जिले के पांच प्रमुख मंदिरों में लागू होगी भोग योजना
➤ भंडारा निर्माण व वितरण के लिए अनिवार्य होगा लाइसेंस
➤ उपायुक्त डीसी कार्यालय से सीसीटीवी के जरिये करेंगे निगरानी
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के पांच प्रमुख मंदिरों में अब “भोग योजना” के तहत भंडारा निर्माण व वितरण पूरी तरह लाइसेंस प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों पर आधारित होगा। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसमें तारा देवी, संकट मोचन, जाखू, हाटकोटी और भीमाकाली मंदिर (सराहन) में इस योजना को आरंभ करने की मंजूरी दी गई।
भोग योजना यानी “ब्लेसफुल हाइजेनिक ऑफरिंग टु गॉड“, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर परोसे जाने वाले प्रसाद और भंडारे की स्वच्छता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इसके तहत हर मंदिर न्यास को पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य रूप से लेना होगा। केवल मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त कर्मचारी ही मंदिर की रसोई में प्रवेश कर सकेंगे।
उपायुक्त ने सभी मंदिर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं। मंदिरों में तैयार किया गया भंडारा तभी श्रद्धालुओं को परोसा जाएगा जब वह भोग योजना के तहत तय मानकों को पूरा करेगा।
साथ ही उपायुक्त ने घोषणा की कि शहर के सभी तीन प्रमुख मंदिरों में लगे सीसीटीवी कैमरों का लॉगिन अब डीसी कार्यालय में उपलब्ध होगा, जहां से वह स्वयं सीधी निगरानी रखेंगे। यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, प्रोटोकॉल अधिकारी ज्योति राणा, एसडीएम ग्रामीण मंजीत शर्मा, सहायक आयुक्त देवी चंद ठाकुर, और FSSAI के सहायक आयुक्त धर्मेंद्र समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
भोग योजना के तहत मंदिरों की पंजीकरण प्रक्रिया, खाद्य स्वच्छता ऑडिट, प्रशिक्षण (FOSTAC), और लाइसेंसिंग अनिवार्य होगी। 12 लाख रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले खाद्य कारोबारियों को एफएसएसएआई लाइसेंस लेना होगा, और सभी मानकों का निरंतर पालन सुनिश्चित करना होगा।
यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा अवैध गतिविधियों, खाद्य विषाक्तता और सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए उठाए गए अहम कदमों में एक है।



