➤ बाबा भूतनाथ मंदिर में तारारात्रि से मक्खन अर्पण की परंपरा शुरू
➤ पहले दिन 21 किलो पहाड़ी गाय के मक्खन से शिवलिंग का श्रृंगार
➤ महाशिवरात्रि तक एक माह चलेगा विशेष मक्खन श्रृंगार
हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक मंडी जिले में स्थित बाबा भूतनाथ मंदिर में तारारात्रि से मक्खन रूपी धृतकंबल चढ़ाने की प्राचीन परंपरा की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि मेले के कारज का भी शुभारंभ हो गया है। पहले दिन पहाड़ी गाय के 21 किलो मक्खन से शिवलिंग का भव्य श्रृंगार किया गया।
यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पहले केवल मक्खन अर्पण किया जाता था और किसी प्रकार का श्रृंगार नहीं होता था। समय के साथ अब मक्खन से भोलेनाथ के विभिन्न दिव्य स्वरूप उकेरे जाते हैं। इन स्वरूपों में देश के प्रसिद्ध मंदिरों में विराजमान भगवान शिव के रूपों की झलक दिखाई देती है।
तारारात्रि से लेकर महाशिवरात्रि तक, यानी पूरे एक महीने तक शिवलिंग पर मक्खन से अलग-अलग स्वरूप बनाए जाएंगे। हर दिन नया स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान भी किए जा रहे हैं।

बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है और इसे पूरे विधि-विधान के साथ निभाया जा रहा है। मंदिर प्रशासन और पुजारी वर्ग इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष तैयारियां कर रहा है।
मान्यता है कि मक्खन को घृत मंडल के रूप में शिव भगवान को अर्पित किया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से 11 महीने तक भगवान को जल चढ़ाया जाता है। इसके बाद एक महीने जल की गागर उतारकर मक्खन चढ़ाया जाता है। इसे शिव आराधना का विशेष काल माना जाता है।
प्राचीन समय में यह परंपरा केवल राजघरानों तक सीमित थी। आज हर श्रद्धालु इस परंपरा में भाग ले सकता है और बाबा भूतनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करता है।
मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में एक गाय रोज नदी पार कर अपने थनों से दूध की धारा मंदिर के पास बहाया करती थी। जब यह बात लोगों में फैली, तो राजा अजबर सेन को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन दिए।
भगवान शिव ने राजा को बताया कि जिस स्थान पर गाय दूध बहाती है, वहां शिवलिंग स्थापित है और उसी स्थान पर मंदिर निर्माण कराया जाए। राजा ने जाकर देखा तो वहां सचमुच शिवलिंग मौजूद था। इसके बाद उसी स्थान पर भूतनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया।
मक्खन श्रृंगार की शुरुआत के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। महाशिवरात्रि के दिन विशाल मेला आयोजित होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।



