➤ ज्वालामुखी मंदिर में गुप्त नवरात्रों में सोने चढ़े गुंबद टूटे
➤ दूटैंट बांधने की लापरवाही से बड़ा हादसा टला
➤ दूडीसी कांगड़ा ने जांच के आदेश दिए
देहरा, Barjeshwar Saki
Golden Dome Collapse; हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध श्री ज्वालामुखी मंदिर में गुप्त नवरात्रों के दौरान सोने चढ़े गुंबद टूटने का बड़ा मामला सामने आया है। यह घटना उस समय हुई जब मंदिर की सजावट के लिए लगाए गए शामियाने (टैंट) को मंदिर प्रशासन ने सीधे गणेश जी और लक्ष्मी माता के मंदिर के गोल्डन प्लेटेड गुंबदों से रस्सियों के जरिए बांध दिया। रस्सियों और चुन्नियों के दबाव से दो भारी गुंबद टूटकर नीचे गिर गए।
गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई श्रद्धालु गुंबदों के नीचे मौजूद नहीं था, वरना जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। इस लापरवाही का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। श्रद्धालुओं और समाजसेवियों ने मंदिर प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मंदिर दर्शन के लिए आए गुरमीत कौर (होशियारपुर), सपना देवी (यूपी), जितेंद्र (पंजाब) ने कहा कि गुप्त नवरात्रों के दौरान मंदिर की पवित्र धरोहर का टूटना बेहद दुखद है। श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन का काम मंदिर की मर्यादा और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन यहां भारी लापरवाही बरती गई।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब पहले कभी सजावट के दौरान ऐसी घटना नहीं घटी, तो इस बार गोल्डन प्लेटेड गुंबदों से टैंट क्यों बांधे गए? यदि ये गुंबद श्रद्धालुओं पर गिरते तो बड़ा हादसा हो सकता था। अब चर्चा है कि टूटे गुंबदों की मरम्मत कौन करेगा और इसका खर्च कौन उठाएगा।
मंदिर न्यास सदस्य कपिल शर्मा ने कहा कि अधिकारी बिना न्यास सदस्यों की राय के ऐसे फैसले लेते हैं। अगर सजावट से पहले विचार-विमर्श होता तो यह घटना टल सकती थी। उन्होंने कहा कि मंदिर की मर्यादा और श्रद्धा को ठेस पहुंची है।
डीसी कांगड़ा एवं मंदिर आयुक्त हेमराज वैरवा ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी और जिम्मेदार कर्मियों से जवाब तलब किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
श्रद्धालुओं ने टूटे गोल्डन प्लेटेड गुंबदों को दोबारा स्थापित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए कड़े प्रबंध करने की मांग की है ताकि मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।



