➤ चिट्टा मामलों में 11 पुलिस कर्मी बर्खास्त
➤ 21–22 जनवरी को एंटी चिट्टा ग्राम सभा
➤ नशे से बनी संपत्तियां होंगी ध्वस्त
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने चिट्टा और नशे के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। ये सभी कर्मचारी एनडीपीएस एक्ट के मामलों में संलिप्त पाए गए थे। सरकार ने यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत की है। इस फैसले के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कानून की रक्षा करने वाली वर्दी में कानून तोड़ने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।
बर्खास्त किए गए पुलिस कर्मियों में इंस्पेक्टर नीरज कुमार (भारतीय रिजर्व बटालियन बनगढ़), कांस्टेबल शुभम ठाकुर (बिलासपुर), कांस्टेबल कपिल (पंडोह), कांस्टेबल शिव कुमार (एसडीआरएफ), कांस्टेबल लक्ष्य चौहान (शिमला), कांस्टेबल विशाल ठाकुर (एसवी एंड एसीबी), कांस्टेबल गौरव वर्मा (जंगलबैरी), कांस्टेबल संदीप राणा (सकोह), कांस्टेबल अंकुश कुमार (एसडीआरएफ), कांस्टेबल रजत चंदेल (स्टेट सीआईडी) और कांस्टेबल राहुल वर्मा (शिमला) शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी चिट्टे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है। यदि पुलिस कर्मी ही चिट्टा गतिविधियों में शामिल होंगे, तो उनके खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि चिट्टा तस्करी और अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने बैठक में चिट्टा के खिलाफ पुलिस विभाग द्वारा की गई कार्रवाइयों को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि चिट्टा तस्करी और गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की पूरी रिपोर्ट तैयार कर मुख्य सचिव को शीघ्र भेजी जाए। इसके साथ ही उन्होंने नशे से कमाई गई संपत्तियों की पहचान कर उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के आदेश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चिट्टा गतिविधियों से बनाई गई सभी संपत्तियों को ध्वस्त किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सूचना देने वालों के लिए ईनाम राशि की घोषणा की। दो ग्राम चिट्टा की सूचना पर 10 हजार, पांच ग्राम पर 25 हजार, 25 ग्राम पर 50 हजार, एक किलो पर 5 लाख और एक किलो से अधिक मात्रा पर 10 लाख रुपये ईनाम दिए जाएंगे। बड़े गिरोह की जानकारी देने वालों को 5 लाख रुपये से अधिक की राशि दी जाएगी।
सरकार ने चिट्टा से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए 112 आपातकालीन नंबर भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे नशे से जुड़ी किसी भी जानकारी को बिना डर साझा करें, ताकि इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके।
इसके साथ ही 21 और 22 जनवरी को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में एंटी चिट्टा ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। वहीं, प्रदेशभर में एंटी चिट्टा अवेयरनेस स्पोर्ट्स टूर्नामेंट भी कराए जाएंगे, ताकि युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया जा सके।
बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु, महाधिवक्ता अनूप रतन, निदेशक ग्रामीण विकास राघव शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



