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हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए अब होगा ‘चिट्टा टेस्ट’

हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए ‘चिट्टा टेस्ट’ होगा अनिवार्य

डॉक्टर-इंजीनियरिंग छात्रों की हर साल होगी ड्रग जांच

123 सरकारी कर्मचारी चिट्टा तस्करी में शामिल पाए गए


हिमाचल प्रदेश में तेजी से फैल रहे चिट्टा और ड्रग नेटवर्क के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि अब भविष्य में सरकारी नौकरी पाने के लिए युवाओं को अनिवार्य रूप से ‘चिट्टा टेस्ट’ से गुजरना होगा। इसके साथ ही डॉक्टर, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्रों की भी हर साल ड्रग जांच करवाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी छात्र की जांच में चिट्टा या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि होती है, तो उसे सीधे रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार युवाओं का भविष्य बर्बाद नहीं होने देगी और नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई गई है।

सुक्खू ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद 1 जून से 20 अगस्त तक प्रदेशभर के स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान डीसी, एडीएम, एसपी, एएसपी, एसडीएम और डीएसपी स्तर के अधिकारी शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह स्वयं जिलों में जाकर एंटी चिट्टा वॉकथन में भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि प्रदेश में अब तक 123 सरकारी कर्मचारी चिट्टा तस्करी में शामिल पाए गए हैं। इनमें पुलिस विभाग के 21 जवान शामिल हैं, जिन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा बिजली बोर्ड के 13, शिक्षा विभाग के 10, बैंकिंग क्षेत्र के 9, आईपीएच विभाग के 9, आर्मी-नेवी के 8, एचआरटीसी के 8 तथा फॉरेस्ट और पीडब्ल्यूडी के 6-6 कर्मचारी भी नशा तस्करी से जुड़े पाए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग, राजस्व, फूड सप्लाई, पोस्ट ऑफिस, सचिवालय, बागवानी, एचपीयू, पंचायत, ट्रेजरी और होमगार्ड जैसे विभागों में भी कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 31 कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा चुका है, जबकि बाकी के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है, जहां पंचायत स्तर पर चिट्टा तस्करों की पहचान कर रेड, येलो और ग्रीन जोन बनाए गए हैं। सरकार अब तक करीब 12 हजार चिट्टा तस्करों और संदिग्ध लोगों की पहचान कर चुकी है। प्रदेश की 224 पंचायतों को रेड जोन में रखा गया है, जहां पुलिस और सीआईडी की विशेष निगरानी चल रही है।

इन रेड जोन पंचायतों में शिमला की 19, सोलन की 9, सिरमौर की 20, बद्दी की 26, मंडी की 24, कुल्लू की 28, बिलासपुर की 27 और कांगड़ा-नूरपुर की 37 पंचायतें शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 6811 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछली सरकार की तुलना में 33.18 प्रतिशत अधिक हैं। इस दौरान 10 हजार 357 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 45 हजार 867 किलोग्राम चिट्टा व अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए।

उन्होंने कहा कि अब तक 174 बड़े और आदतन ड्रग तस्करों को हिरासत में लिया गया है। वहीं “पिट एनडीपीएस एक्ट” के तहत कार्रवाई करने में हिमाचल प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। पूरे भारत में इस कानून के तहत हुई कुल कार्रवाई में 33 प्रतिशत मामले अकेले हिमाचल के हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि चिट्टा तस्करी से अर्जित 70 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 17 अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि अन्य मामलों में कार्रवाई जारी है। साथ ही सरकार ने नशा तस्करी की सूचना देने वालों के लिए इनाम राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपए करने का फैसला लिया है।