➤ आपदा प्रबंधन मंत्री नेगी ने 1500 करोड़ का पैकेज नाकाफी बताया
➤ राज्य सरकार ने अनटाइड बजट की मांग रखी ताकि सहायता सही जगह खर्च हो सके
➤ मंडी समेत प्रदेश में अब तक 4500 करोड़ का नुकसान और 380 लोगों की मौत
हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन एवं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में राज्य के लिए घोषित 1500 करोड़ रुपए के स्पेशल पैकेज को नाकाफी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यदि यह राशि टाइड बजट के रूप में आती है, तो इसका कोई बड़ा लाभ राज्य को नहीं होगा। लेकिन यदि केंद्र सरकार इसे अनटाइड बजट यानी बिना शर्त के देती है, तो राज्य सरकार इसे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार सड़कों, बिजली, पानी और आपदा प्रभावितों की सहायता में लगा सकेगी।
मंत्री नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अभी तक 2023 की आपदा से भी पूरी तरह उबर नहीं पाया था, और इस साल की बारिश ने फिर से 4500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद नुकसान का आकलन कर चुके हैं, इसलिए बड़ा स्पेशल पैकेज मिलना चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक नुकसान का आकलन हुआ था, लेकिन केंद्र से सिर्फ 1500 करोड़ रुपए ही मिले थे। उन्होंने आशंका जताई कि इस बार भी कहीं वही स्थिति न हो।
नेगी ने कहा कि हिमाचल सरकार चाहती है कि मदद सीधे नकद सहायता के रूप में मिले, ताकि सड़क, बिजली, पानी की बहाली और प्रभावितों की सहायता में आसानी हो सके। उन्होंने बताया कि इस साल मानसून में अब तक 380 लोगों की जान जा चुकी है, 1392 मकान पूरी तरह ढह गए हैं और 6114 मकानों को आंशिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा 529 दुकानें और 6162 गोशालाएं भी तबाह हो गईं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को हिमाचल के दौरे पर आए थे। उन्होंने कुल्लू, मंडी और चंबा जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और 18 प्रभावित परिवारों से मुलाकात भी की। मंडी में उन्होंने एक बच्ची को गोद में उठाकर सांत्वना दी, जिसके परिवार के तीन सदस्य बादल फटने से आई बाढ़ में मारे गए थे।
राज्य सरकार ने भी आपदा प्रभावितों के लिए स्पेशल पैकेज घोषित किया है, जिसके तहत पूरी तरह मकान खोने वालों को 7 लाख और आंशिक नुकसान वालों को 1 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी।
इस बार मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, इसके अलावा कुल्लू, कांगड़ा, चंबा, ऊना और शिमला भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हिमाचल सरकार पहले से ही 98 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी है और लगातार आपदाओं के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर होती जा रही है।



