➤ धारा 118 में बदलाव कर उद्योगों को राहत
➤ बिजली बिलों में 40 पैसे प्रति यूनिट की छूट प्रस्तावित
➤ आपदा से उद्योगों को हुआ हजारों करोड़ का नुकसान
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा ने आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक को गहरी चोट पहुंचाई है। राज्य के उद्योगों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हिमाचल सरकार अब उद्योगों को राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने जा रही है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार धारा 118 में बदलाव करने की तैयारी कर रही है, ताकि पहले से स्थापित उद्योगों को बेचने या मालिकाना हक बदलने के लिए दोबारा अनुमति लेने की जरूरत न पड़े।
मंत्री ने यह भी कहा कि किराए पर ली गई संपत्ति पर उद्योग लगाने के लिए भी अब 118 की अनुमति जरूरी नहीं होगी। भाजपा सरकार ने 2022 में अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में यह प्रावधान लागू किया था, जिससे उद्योग जगत में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
इसके अलावा उद्योगों को राहत देने के लिए सरकार ने बिजली के बिलों में 40 पैसे प्रति यूनिट की छूट देने पर भी विचार किया है। मंत्री चौहान ने माना कि मौजूदा सरकार ने दरें बढ़ाई थीं, लेकिन अब आपदा के चलते उद्योगों को प्रोत्साहन और सहारा देने के लिए यह कदम जरूरी है।
उन्होंने बताया कि 2004 में केंद्र सरकार से मिले औद्योगिक पैकेज के बाद हिमाचल में उद्योगों ने बड़ी छलांग लगाई थी। उस समय प्रदेश का औद्योगिक निर्यात 550 करोड़ रुपये था, जो 2025 तक बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। आज प्रदेश की जीडीपी में उद्योगों का योगदान अहम है।
आपदा से हुए नुकसान पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि 2023 में प्रदेश को लगभग 10,000 करोड़ रुपये और 2025 में करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद सरकार ने स्थिरता बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि राज्य का राजस्व बढ़ाने के लिए नदी और नालों से खनन (River Bed Mining) की अनुमति भी आवश्यक है। फिलहाल FCA कानून के चलते केवल एक साइट को स्वीकृति मिली है, जबकि 32 नदियों के किनारे 3022 साइट्स प्रस्तावित हैं। सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि इन्हें वन-टाइम अनुमति दी जाए।
जीएसटी सुधारों पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने नई दरों का स्वागत किया है, लेकिन इससे राज्य को 800 से 1000 करोड़ रुपये सालाना राजस्व घाटा होने की आशंका है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि 2017 की तरह राज्यों को होने वाले घाटे की भरपाई की जाए।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य न केवल आपदा प्रभावित उद्योगों को सहारा देना है, बल्कि नए निवेशकों को आकर्षित कर हिमाचल में औद्योगिक माहौल को जीवंत बनाए रखना भी है।



