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हिमाचल में 25 साल बाद लॉटरी की वापसी की तैयारी

हिमाचल में लॉटरी शुरू करने को कैबिनेट सब कमेटी अधिसूचित
एक माह में लॉटरी नियम 2026 का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश
राज्य को 100–150 करोड़ सालाना आय का अनुमान


हिमाचल प्रदेश में करीब ढाई दशक बाद एक बार फिर लॉटरी योजना शुरू करने की दिशा में सरकार ने औपचारिक कदम बढ़ा दिया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी का गठन कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस उप समिति को हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम 2026 का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि समिति एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश में लॉटरी योजना को दोबारा शुरू करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया था। राज्य सरकार फिलहाल राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में अतिरिक्त राजस्व के स्रोत तलाशे जा रहे हैं। इसी कड़ी में लॉटरी को एक संभावित आय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। अनुमान है कि योजना लागू होने के बाद राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 100 से 150 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है।

कैबिनेट सब कमेटी में उद्योग मंत्री के अलावा पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं निदेशक कोषागार को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। समिति को लॉटरी संचालन की पारदर्शी व्यवस्था, वितरण प्रणाली और राजस्व प्रबंधन को लेकर विस्तृत नियमावली तैयार करनी होगी।

सरकार इस प्रक्रिया में केरल और पंजाब के सफल लॉटरी मॉडलों का अध्ययन भी करेगी, ताकि हिमाचल के लिए एक प्रभावी और नियामक ढांचा तैयार किया जा सके। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1999 में तत्कालीन सरकार ने प्रदेश में लॉटरी पर रोक लगा दी थी। अब करीब 25 साल बाद इसे दोबारा शुरू करने की पहल ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।