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हिमाचल के 11 जिलों में पंचायत चुनाव का आरक्षण रोस्टर जारी

हिमाचल के 11 जिलों में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी, शिमला में प्रक्रिया जारी
54 से 55 फीसदी सीटें आरक्षित, महिलाओं के 50% कोटे से ओपन सीटें घटीं
हाईकोर्ट की रोक से रोस्टर में देरी, 31 मई से पहले चुनाव कराना अनिवार्य



हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद पंचायत चुनावों के आरक्षण रोस्टर को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। शिमला जिले को छोड़कर प्रदेश के 11 जिलों में आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया गया है, जबकि शिमला जिला में अभी भी रोस्टर तय करने की प्रक्रिया जारी है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सभी जिलों के डीसी को आज ही रोस्टर फाइनल करना था, अन्यथा इसे अदालत की अवमानना (Contempt of Court) माना जा सकता है।

दरअसल, डीसी को पांच फीसदी सीटें तय करने की दी गई शक्तियों पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के कारण रोस्टर जारी करने में देरी हुई। राज्य सरकार ने दिन के समय सभी जिलों के डीसी को पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद जिलों में प्रक्रिया तेज की गई। कुल्लू जिला ने सबसे पहले रोस्टर जारी किया, जिसके बाद अन्य जिलों ने भी क्रमवार अपनी सूची जारी करनी शुरू कर दी।

इस बार पंचायत चुनावों में 54 से 55 फीसदी सीटें आरक्षित की गई हैं, जबकि 44 से 45 फीसदी सीटें ओपन श्रेणी में रखी गई हैं। प्रदेश में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण लागू होने के कारण ओपन सीटों की संख्या अपेक्षाकृत कम हुई है। ओपन सीटों पर कोई भी पात्र उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है, जबकि आरक्षित सीटों पर केवल उसी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेगा, जिसके लिए सीट आरक्षित की गई है।

हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सभी जिलों में शाम 5 बजे तक रोस्टर जारी करना अनिवार्य था, लेकिन एक-दो जिलों को छोड़कर अधिकांश जिले समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। जिन जिलों ने सोमवार को पहले ही रोस्टर जारी कर दिया था, उन्हें भी मंगलवार को नए सिरे से रोस्टर तैयार करना पड़ा, क्योंकि हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा डीसी को दी गई पांच फीसदी अतिरिक्त शक्तियों पर तत्काल रोक लगा दी थी।

प्रदेश में 3600 से अधिक पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ये चुनाव 31 मई 2026 से पहले कराए जाना अनिवार्य है। फिलहाल राज्य सरकार ने पंचायतों और नगर निकायों में प्रशासक नियुक्त कर रखे हैं, क्योंकि अधिकांश नगर निकायों का कार्यकाल 17 जनवरी 2026 और पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। उस समय चुनाव आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार था, लेकिन सरकार ने आपदा का हवाला देकर चुनाव स्थगित कर दिए थे।

अब आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद पंचायत चुनावों की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।