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राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के समक्ष सुक्खू कैबिनेट ने बैठक में उठाया आरडीजी का मुद्दा

➤ नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की अहम बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर गहन मंथन
➤ हिमाचल की सेब आर्थिकी पर पड़ रहे असर को लेकर केंद्र से ठोस रणनीति पर चर्चा


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने की। मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक में शामिल हुए, जहां हिमाचल से जुड़े वित्तीय और आर्थिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य एजेंडा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के प्रभावों पर केंद्रित रहा। हिमाचल जैसे पर्वतीय और विशेष श्रेणी के राज्य के लिए आरडीजी बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राजस्व संसाधन सीमित हैं। ऐसे में इस अनुदान में किसी भी प्रकार की कटौती या नीति परिवर्तन से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है।

बैठक में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आयातित फलों, विशेषकर सेब, पर पड़ रहे प्रभाव को भी प्रमुखता से उठाया गया। हिमाचल की अर्थव्यवस्था में सेब आर्थिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हुए हैं। नेताओं ने चिंता जताई कि सस्ते आयातित सेब के कारण स्थानीय बागवानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग को लेकर रणनीति तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्यों के हितों की रक्षा के लिए संयुक्त रूप से आवाज उठाने और संसद से लेकर सड़क तक मुद्दों को मजबूती से रखने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने हिमाचल की विशिष्ट परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए पार्टी नेतृत्व से राज्य के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए सहयोग मांगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक न केवल वित्तीय मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, बल्कि सेब उत्पादक किसानों के हितों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार की ओर से इन मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और हिमाचल को राहत दिलाने के लिए आगे क्या रणनीति अपनाई जाती है।