➤ धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में सरकार की बड़ी पहल
➤ कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के लिए हवाई अड्डा, हेलीपोर्ट और रोपवे परियोजनाओं पर तेज़ी से काम
➤ मंदिरों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन दर्शन की सुविधा पर सरकार का विशेष फोकस
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में सरकार ने प्रयास तेज़ कर दिए हैं। इसी उद्देश्य को लेकर बुधवार को धर्मशाला स्थित एचपीटीडीसी होटल द धौलाधार के कॉन्फ्रेंस हॉल में “दर्शन : हिमाचल प्रदेश में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन पर राउंडटेबल” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

यह राउंडटेबल डेवलपमेंट लीडर्स एलायंस (डीएलए), वीज़ा तथा पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन की संभावनाओं पर व्यापक मंथन कर भविष्य की रणनीति तैयार करना रहा।

आर.एस. बाली ने कहा कि इस चर्चा से प्राप्त सुझाव प्रदेश में पर्यटन के दीर्घकालिक और समग्र विकास की नीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार केवल धार्मिक स्थलों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिले को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए हवाई संपर्क का विस्तार, हेलीपोर्ट निर्माण, रोपवे परियोजनाएं, जल क्रीड़ा गतिविधियों का विस्तार तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे अनेक बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में हेलीपोर्ट विकसित करने का कार्य भी प्रगति पर है।

आर.एस. बाली ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को मंदिरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों का डिजिटलीकरण किया जाएगा ताकि देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु अपने घरों से ही पूजा, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का ऑनलाइन दर्शन कर सकें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक संस्कृति का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके लिए प्रसिद्ध संगीत कलाकारों और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर सांस्कृतिक उत्सवों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक प्रचार माध्यमों के जरिए प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि ज्वालामुखी में पर्यटकों की सुविधा के लिए हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं वाला नया होटल बना रहा है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी।
आर.एस. बाली ने कहा कि कांगड़ा और इसके आसपास लगभग 60 किलोमीटर के दायरे में छह प्रमुख शक्तिपीठ एवं धार्मिक स्थल स्थित हैं। इसके अलावा यहां नदियां, पर्वत, चाय बागान, बौद्ध मठ और पैराग्लाइडिंग जैसी रोमांचक गतिविधियां मौजूद हैं। प्रकृति, अध्यात्म और रोमांच का यह अनूठा संगम कांगड़ा को देश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में स्थापित करने की अपार संभावनाएं प्रदान करता है।
राउंडटेबल चर्चा के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने, स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण, विरासत संवर्धन तथा सतत पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया और कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर उपायुक्त हेमराज बैरवा, मुख्य अरण्यपाल बासु कौशल, उप निदेशक पर्यटन विनय धीमान, एसडीएम मोहित रत्न, डीएफओ अमित कुमार, इंटैक उपाध्यक्ष मालविका पठानिया, नरेंद्र अवस्थी, देचेन नामग्याल, कुलदीप कुमार, डीएलए के संस्थापक संकल्प शुक्ला सहित पर्यटन, संस्कृति, विरासत संरक्षण, आतिथ्य और उद्योग क्षेत्र से जुड़े अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।



