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हिमाचल विश्वविद्यालय इटली-नॉर्वे के साथ मिलकर करेगा आपदा पर अध्ययन, जानें पूरी खबर

➤ हिमाचल विश्वविद्यालय ने आपदा अध्ययन के लिए इटली और नॉर्वे से MOU साइन किए
➤ “कैंपस टू कम्युनिटी” मिशन के तहत चार जिलों में शुरू हुआ रिसर्च
➤ आपदा बचाव, अर्ली वार्निंग सिस्टम और AI तकनीक पर होगा फोकस

पराक्रम चंद, शिमला


हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) ने हिमालय क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के कारणों और बचाव उपायों पर गंभीर पहल की है। विश्वविद्यालय ने “कैंपस टू कम्युनिटी” मिशन के तहत डिजास्टर रिसर्च सेंटर का गठन किया है, जो आपदा के कारणों, बचाव, अर्ली वार्निंग सिस्टम और जागरूकता पर काम करेगा। इसके लिए इटली के पडोवा विश्वविद्यालय और नॉर्वे के नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट (NGI) के साथ MOU पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

अध्ययन का काम फिलहाल मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और शिमला जिलों में शुरू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल में बादल फटना, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि विज्ञान और तकनीक के सहारे आपदा का समय रहते पूर्वानुमान लगाया जाए और बचाव के ठोस उपाय किए जाएं।

विश्वविद्यालय न केवल शोध करेगा बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला भी आयोजित करेगा, जिसके सुझावों को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। गांव के बुजुर्गों के अनुभवों को भी इस रिसर्च में शामिल किया जाएगा। साथ ही स्कूल और कॉलेज स्तर पर क्रेडिट बेस कोर्स शुरू करके बच्चों को आपदा के प्रति जागरूक किया जाएगा।

विश्वविद्यालय के Himalayan Centre for Disaster Risk Reduction and Resilience (HIM-DR3) के उपनिदेशक डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि फिलहाल शिमला, धर्मशाला, कुल्लू और मंडी में मॉनिटरिंग हो रही है और पिछले 10 सालों का डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। इससे आपदा के पैटर्न और संभावित खतरों का वैज्ञानिक विश्लेषण होगा।

इटली की पडोवा यूनिवर्सिटी के लैंडस्लाइड साइंटिस्ट प्रो. संसारा राज मीणा ने कहा कि इस रिसर्च में AI तकनीक, एडवांस्ड मशीन लर्निंग, ग्लोबल और सैटलाइट डेटा का इस्तेमाल होगा। लक्ष्य यह है कि वैज्ञानिक जानकारी और कम्युनिटी के सहयोग से समय रहते आपदा का पता चल सके और नुकसान को कम किया जा सके।