➤ मंडी की बोई पंचायत में भूस्खलन से एक परिवार के पांच लोग दबे
➤ एक महिला की मौत, दो सुरक्षित निकाले गए, दो अब भी लापता
➤ छह जिलों में बारिश का येलो अलर्ट, 490 सड़कें और 352 ट्रांसफार्मर ठप
हिमाचल प्रदेश में बारिश का कहर लगातार जारी है। मंडी जिले की निहरी तहसील की बोई पंचायत में सोमवार देर रात भारी बारिश के चलते पहाड़ी दरक गई और भीषण भूस्खलन हो गया। इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोग मलबे में दब गए। अब तक दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि एक महिला का शव बरामद हुआ है। बाकी दो लोगों की तलाश जारी है।

लगातार बारिश और जमीन खिसकने के खतरे के कारण राहत-बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। सड़क मार्ग बंद होने से बचाव दल मौके तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण ही खुद मलबा हटाकर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन ने रेस्क्यू टीमें मौके पर भेज दी हैं, लेकिन हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं।
उधर, धर्मपुर बाजार से होकर बहने वाली सोन खड्ड ने इतना विकराल रूप धारण किया कि तबाही मचा दी। रात 11 बजे से जिले के अधिकतर स्थानों पर बारिश का दौर शुरू हो गया और रात एक बजे के करीब यह बारिश इतनी ज्यादा तेज हो गई कि लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए।
मंडी जिला के सरकाघाट और धर्मपुर उपमंडलों में भी बेहद ज्यादा बारिश हुई। इस बारिश के कारण यहां बहने वाली साने खड्ड ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर दिया। इस कारण धर्मपुर का बस स्टैंड पूरी तरह से जलमग्न हो गया।
इस बस स्टैंड में खड़ी निगम की बसें पानी में डूब गई और कुछ बसें पानी के बहाव के साथ बह गई। खड्ड के किनारे जिन लोगों के घर थे वो भी पानी में डूब गए और यहां खड़े कई निजी वाहन भी पानी के तेज बहाव में बह गए जिसमें स्कूटर, बाइक और कार आदि शामिल हैं।
छतों पर चढ़ गए लोग: घरों में पानी घुसने के कारण लोग घरों की दूसरी मंजिल और छतों पर चढ़ गए। यहां एक होस्टल भी है जिसमें 150 बच्चे थे उन्होंने भी दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाकर अपनी जान बचाई।
रात में ही अलर्ट हो गईं थीं टीमें
उधर, डीएसपी धर्मपुर संजीव सूद ने बताया कि रात को जब तेज बारिश हुई तो पुलिस और रेस्क्यू टीमें तुरंत ही मैदान में जुट गई थी। लोगों को सुरक्षित निकालने का काम रात भी चला रहा।
एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी
अभी तक किसी प्रकार के जानी नुकसान की सूचना नहीं है। एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी मिल रही है जिसे पुष्टि किया जा रहा है। बहुत से वाहन बह गए हैं। घरों और दुकानों में मलबा घुस गया है। अभी सोन खड्ड का जलस्तर सामान्य हो रहा है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर स्थिति का जायजा ले रही हैं।

प्रदेश में बारिश से हालात बिगड़े हुए हैं। सोमवार शाम तक प्रदेश में 490 सड़कें, 352 बिजली ट्रांसफार्मर और 163 पेयजल योजनाएं प्रभावित रहीं। मौसम विभाग ने आज छह जिलों – बिलासपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट जारी किया है।
राजधानी शिमला में मंगलवार को दिनभर बादल छाए रहे। दोपहर में बूंदाबांदी हुई और हल्की धूप भी निकली। वहीं, कांगड़ा जिले में सुबह धूप खिलने के बाद दोपहर में धर्मशाला सहित कई हिस्सों में बारिश हुई। चंबा जिले में भरमौर-पठानकोट हाईवे 13 घंटे तक बंद रहा क्योंकि भारी भूस्खलन और पेड़ों के गिरने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ।
ऊना जिले में बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बंगाणा क्षेत्र में खेतों में अधिक नमी के कारण आलू की बिजाई रुक गई, जबकि अन्य इलाकों में थोड़ी देर बाद मौसम साफ होने से किसानों को राहत मिली। कुल्लू जिले में मौसम साफ रहा और बंद सड़कों व प्रभावित बिजली-पानी की बहाली का काम युद्धस्तर पर जारी है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने चेतावनी दी है कि राज्य के कुछ हिस्सों में 21 सितंबर तक बारिश जारी रह सकती है। बीते 24 घंटों में जोगिंद्रनगर, पालमपुर, पंडोह और कांगड़ा समेत कई इलाकों में 30 से 56 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई है।



