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मातृ नमन कार्यक्रम में बोले जयराम ठाकुर, माताएं ठान लें तो कोई बाधा नहीं रोक सकती

➤ मातृ नमन कार्यक्रम में मातृत्व के महत्व और शक्ति पर बोले जयराम ठाकुर
➤ माताएं तय कर लें तो कोई बाधा उनका रास्ता नहीं रोक सकती
➤ लोक माता अहिल्याबाई के कार्यों में दिखती है आधुनिक भारत की झलक


शिमला के गेयटी थियेटर में श्यामला ट्रस्ट द्वारा आयोजित लोक माता अहिल्याबाई होलकर मातृ नमन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस कार्यक्रम में पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि मातृवंदन है, क्योंकि मां के बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

जयराम ठाकुर ने कहा कि जीवन में जो भी संस्कार, संघर्ष और प्रेरणा मिलती है, उसकी जड़ में मां होती है। मां पहली गुरु होती है, जो बोलना, चलना और जीवन जीना सिखाती है। मां केवल जन्म नहीं देती बल्कि जीवन को दिशा और अर्थ देती है। उनके त्याग, अनुशासन और प्रेम से ही व्यक्ति महान, परिवार संस्कारित और राष्ट्र सशक्त बनता है।

उन्होंने कहा कि यदि दुनिया को बेहतर बनाना है तो माताओं का सम्मान, समर्थन और सशक्तिकरण आवश्यक है, क्योंकि हर महान व्यक्तित्व के पीछे मातृशक्ति खड़ी होती है। इस अवसर पर अपने संघर्ष और लगन से बच्चों को आगे बढ़ाने वाली माताओं को सम्मानित भी किया गया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि माताएं जब ठान लेती हैं तो उनकी राह में कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे सहारा योजना के माध्यम से एक मां ने पति के छोड़ जाने के बाद भी दिव्यांग बच्चों की परवरिश की। वहीं शगुन योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बेटी ने मिला चेक पिता को सौंपते हुए कहा कि यह पैसा उन लोगों को लौटा दें जिनसे कर्ज लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह भावना केवल मातृशक्ति में ही संभव है।

लोक माता अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनके कार्यों में आधुनिक भारत की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हाल ही में उनकी जन्म त्रिशताब्दी मनाई गई, लेकिन इतिहास ने उनके साथ पूरा न्याय नहीं किया।

उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, सामाजिक सुधार, व्यापार, कृषि और उद्यमिता को बढ़ावा दिया। उन्होंने बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कार्य किया। काशी के घाटों का जीर्णोद्धार, काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, विष्णुपद मंदिर गया, ज्ञान वापी मंदिर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित कई धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण उनके कार्यों की पहचान है। उनकी नीतियों ने हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत किया।

कार्यक्रम में रुबिका लियाकत, नितिन व्यास, सूरज जमालटा, ईशा शर्मा, सुरेश भारद्वाज सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।