➤ हिमाचल सरकार ने दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया
➤ मिल्कफेड प्रतिदिन 38,400 किसानों से औसतन 2.32 लाख लीटर दूध खरीद रहा
➤ 11 दूध संयंत्र, चिलिंग प्लांट, समितियों व एनडीडीबी सहयोग से डेयरी क्षेत्र का तेजी से विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में पहली बार दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया गया है, जिससे किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सरकार का लक्ष्य है कि गांव, किसान, महिलाएं और युवा प्रदेश की आर्थिक प्रगति के केंद्र में रहें।
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश दुग्ध प्रसंघ (मिल्कफेड) 38,400 किसानों से औसतन 2.25 लाख लीटर गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रहा है। इसके अतिरिक्त, 1,482 भैंस पालकों से 7,800 लीटर दूध 61 रुपये प्रति लीटर और ऊना जिले में पायलट आधार पर बकरी का दूध 70 रुपये प्रति लीटर खरीदा जा रहा है। कुल मिलाकर प्रतिदिन औसतन 2.32 लाख लीटर दूध किसानों से खरीदा जा रहा है।
दूध की खरीद और विपणन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने परिवहन सब्सिडी को 1.50 रुपये से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। साथ ही दो किलोमीटर से अधिक दूरी पर दूध लाने वाले पशुपालकों को 2 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेशभर में बल्क मिल्क कूलर और मिनी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि दूध की गुणवत्ता सुरक्षित रह सके।
वर्तमान में 11 दूध प्रसंस्करण संयंत्र कार्यरत हैं जिनकी कुल क्षमता 1.80 लाख लीटर प्रतिदिन है। शिमला जिले के दत्तनगर में मिल्क पाउडर प्लांट और हमीरपुर में पशु आहार संयंत्र किसानों को सहूलियत दे रहे हैं। दत्तनगर में हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले नए संयंत्र का उद्घाटन किया गया है, जिससे वहां कुल क्षमता 70 हजार लीटर प्रतिदिन हो गई है।
मिल्कफेड के प्रयासों से किसानों को हर महीने औसतन 39.48 करोड़ रुपये का लाभ मिल रहा है। राज्य में अब तक 268 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है, जिनमें 20 महिला समितियां भी शामिल हैं। किसानों की सुविधा के लिए स्वचालित मिल्क कलेक्शन यूनिट (AMCUs) और दूध जांच केंद्र भी लगाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से कांगड़ा जिले के ढगवार में 200.43 करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख लीटर क्षमता का पूरी तरह स्वचालित संयंत्र तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा नाहन, नालागढ़, मौहल और रोहड़ू में भी नए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन पहलों से न केवल दूध उत्पादकों को पारदर्शी भुगतान और बेहतर मूल्य मिल रहा है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी गई है।



