Kirti Chakra: ऊना जिले के बंगाणा, घरवासड़ा निवासी नायक दिलवर खान को मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनके असाधारण साहस और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च बलिदान की श्रद्धांजलि है।
76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के 93 कर्मियों को वीरता पुरस्कारों से नवाजा, जिसमें 11 मरणोपरांत पुरस्कार भी शामिल थे। इनमें से एक मरणोपरांत ‘कीर्ति चक्र’ हिमाचल प्रदेश के वीर सपूत नायक दिलवर खान को प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी अद्वितीय वीरता और बलिदान के लिए उन्हें दिया गया, जिसने मातृभूमि की रक्षा में अपनी जान न्योछावर कर दी।
साहसिक वीरता की मिसाल
नायक दिलवर खान, जो भारतीय सेना के गनर थे, ने 23 जुलाई 2024 को श्रीनगर के पास आतंकवादियों के साथ एक खतरनाक मुठभेड़ में अपने प्राणों की आहुति दी। अपनी टीम के सुरक्षा के लिए वह न केवल दुश्मन से लड़े, बल्कि अपने घावों की परवाह किए बिना आतंकवादियों को मात देने में सफल रहे। उनकी शहादत को ‘कीर्ति चक्र’ के रूप में राष्ट्र ने सम्मानित किया, जो भारतीय सेना के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों में एक है।
नायक दिलवर खान की शहादत इस क़दर प्रेरणादायक है कि पूरे देश ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका बलिदान और वीरता न केवल सेना के जवानों के लिए, बल्कि हर भारतीय नागरिक के लिए एक प्रेरणा बन गई है। उनका नाम हमेशा भारतीय सेना के शौर्य के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा।

क्या हुआ था 23 जुलाई, 2024 को?
23 जुलाई 2024 को कुपवाड़ा जिले के लोलाब घाटी में नायक दिलवर खान अपनी टुकड़ी के साथ आतंकवादियों से लोहा ले रहे थे। रात के करीब 11:30 बजे उनकी टुकड़ी ने दो आतंकवादियों को देखा, जिसमें एक उनके बहुत करीब था। इन आतंकवादियों का मंसूबा बेहद घातक था। अपनी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, नायक दिलवर खान ने बिना किसी भय के खुद को खतरे में डाला और आतंकवादी पर झपट्टा मारा।
इस संघर्ष में नायक दिलवर खान ने आतंकवादी से हाथापाई की, जबकि दूसरा आतंकवादी दूर से अंधाधुंध गोलीबारी कर रहा था। नायक दिलवर खान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उनके साहस में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने अपनी अंतिम सांसों तक आतंकवादी को पकड़ रखा और अपनी शहादत के पहले उसे मार गिराया।
दिलवर खान का जीवन संघर्ष और बलिदान
नायक दिलवर खान का जन्म मार्च 1996 में हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में 20 जनवरी 2014 को मात्र 18 साल की उम्र में भर्ती होकर मातृभूमि की सेवा का संकल्प लिया। उनका परिवार, विशेष रूप से उनके पिता करम दीन और मां भोलान बीबी, उनकी इस वीर यात्रा में अहम सहायक रहे।
दिलवर खान का भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना स्कूल के दिनों से ही था, और यह सपना उन्हें अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करता था। उन्होंने अपनी वीरता और साहस से यह सिद्ध कर दिया कि एक सैनिक का सबसे बड़ा कर्तव्य अपनी मातृभूमि की रक्षा करना है, चाहे वह अपनी जान दे कर ही क्यों न हो।
स्मरणीय बलिदान
नायक दिलवर खान ने अपनी शहादत से भारतीय सेना के प्रत्येक जवान के लिए एक आदर्श स्थापित किया। उनकी वीरता, साहस और बलिदान को न केवल देशभर में सम्मानित किया गया, बल्कि उनकी शहादत की गाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
देश ने नायक दिलवर खान के बलिदान को सलाम किया है और उनकी शहादत को कभी नहीं भुलाया जाएगा। उनके परिवार को हमारी तरफ से गहरी सहानुभूति और सम्मान।



