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पितृपक्ष का पहला दिन आज, पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए होगा श्राद्ध और तर्पण

पितृपक्ष का पहला दिन आज से शुरू
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व
पूर्वजों के आशीर्वाद से सुख-समृद्धि की मान्यता


आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यह पावन काल प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में हमारे पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। इस दिन से लेकर पूरे 15 दिनों तक परिवारजन अपने पितरों को याद कर उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की प्रार्थना करते हैं।

पंचांग के अनुसार, 8 सितंबर को प्रतिपदा तिथि रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। इस दिन पूर्व भाद्रपद और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का योग बन रहा है। वहीं दिन भर पंचक का प्रभाव रहेगा, जिसके चलते गृह निर्माण, विवाह या नई यात्रा जैसे कार्यों से परहेज़ करने की सलाह दी गई है।

पितृपक्ष के पहले दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि अज्ञात हो या जिनका विधिपूर्वक श्राद्ध न हो पाया हो। खासकर मातृ पक्ष यानी नाना-नानी के श्राद्ध का महत्व इस दिन और भी अधिक होता है। श्रद्धालु घर को शुद्ध कर, गंगाजल का छिड़काव करते हैं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करते हैं। कुशा, जल, तिल, जौ और खीर, शहद, गंगाजल जैसी वस्तुएं इस दिन पितरों को अर्पित की जाती हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इस पवित्र कार्य से पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि और आरोग्यता का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही ब्राह्मण भोज, दान-पुण्य और गोदान जैसे कार्य इस अवधि में विशेष फलदायी माने जाते हैं।