➤ बारिश और भूस्खलन से शिमला जिले की सड़कें अब भी बाधित
➤ प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को जेसीबी की बकेट में नाला पार कराया गया
➤ ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग को दोहराया
शिमला जिले के दुर्गम इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण अब भी कई सड़कें बहाल नहीं हो पाई हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठाना पड़ रहा है। हाल ही में पांवटा साहिब-नेरवा मुख्य मार्ग पर राणा क्यार गांव के पास एक ऐसी ही मार्मिक घटना सामने आई।
बरसात के बीच शलन गांव की एक गर्भवती महिला मोनिका पत्नी सुनील को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। सड़क मार्ग बंद होने के चलते ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर महिला को अस्पताल तक पहुंचाने का साहसिक कार्य किया। उन्होंने महिला को जेसीबी की बकेट में बिठाकर उफनते नाले को पार करवाया और फिर सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।
यह नाला, जो राणा क्यार गांव और मुख्य मार्ग के बीच बहता है, बरसात के दिनों में उफान पर आ जाता है। चूंकि इस पर कोई पुल नहीं है, इसलिए हर बरसात में लोगों को जान जोखिम में डालकर इसे पार करना पड़ता है। स्थानीय समाजसेवी अतर सिंह राणा ने बताया कि वे गर्भवती महिला को अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ता जगह-जगह बंद था। कई गांववासी खुद गैंती-बेलचे लेकर रास्ता साफ करते रहे, परंतु राणा क्यार नाले तक पहुंचने पर उन्हें जेसीबी की मदद लेनी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि 2019 और 2023 में भी इस नाले में भीषण बाढ़ आई थी, जिससे कई मकान बह गए थे। उस समय प्रशासन ने मौके का जायजा लिया था और स्थानीय प्रतिनिधियों ने बार-बार पुल निर्माण की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
गांव के पूर्व प्रधान अमर चंद नेगी, तपेंद्र नेगी, राजेंद्र सिंह डोगरा और अन्य ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू तथा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से आग्रह किया है कि इस नाले पर शीघ्र पुल का निर्माण करवाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की आपात स्थितियों से लोगों को बचाया जा सके।



