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सूर्य का रोहिणी में प्रवेश, जानें क्या कहता है ज्योतिष

  • नौतपा के पहले दो दिन गर्मी के बजाय बारिश ने दी राहत, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव

  • ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, यह समय प्राकृतिक आपदाओं और ग्रह-दोषों के संकेत दे रहा है

  • सूर्य की रोहिणी नक्षत्र में स्थिति को मानसून का गर्भकाल माना जाता है, जिससे सूर्य की पूजा इन दिनों फलदायी मानी जाती है


Rohini Nakshatra: उत्तर भारत में नौतपा के शुरुआती दिनों में बारिश ने लोगों को अप्रत्याशित राहत दी है। आमतौर पर इस कालखंड में जबरदस्त लू और चिलचिलाती गर्मी देखने को मिलती है, लेकिन इस बार दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश की फुहारों ने मौसम को ठंडा कर दिया है। हालांकि ज्योतिषीय नजरिए से ये संकेत सामान्य नहीं माने जा रहे।

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, 25 मई दोपहर 3:15 बजे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश हुआ है, जिससे नौतपा शुरू हुआ। परंपरागत रूप से यह समय गर्मी के चरम का होता है, लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र के दौरान बारिश हो, तो इसे “रोहिणी का गलना” कहा जाता है, जो प्रकृति में असंतुलन का संकेत देता है।

उन्होंने बताया कि नौतपा के नौ दिन सूर्य की किरणें सीधी और तीव्र होती हैं, जिससे मौसम में अत्यधिक गर्मी होती है। लेकिन इस बार बारिश और बादलों के कारण यह उष्णता बाधित हो रही है, जो आगे चलकर मानसून की अनियमितता का कारण बन सकती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नौतपा का संबंध सूर्य सिद्धांत और श्रीमद्भागवत से भी है। यदि नौतपा के दिन तपते हैं तो वर्षा अच्छी होती है, लेकिन यदि रोहिणी नक्षत्र के दौरान वर्षा हो तो वर्षा में कमी आ सकती है। यही कारण है कि रोहिणी में सूर्य की पूजा विशेष फल देती है।


क्या करें और क्या न करें

  • सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें।

  • अर्घ्य के जल में कंकूम मिलाएं और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप करें।

  • नौतपा के दिनों में विवाह और मांगलिक कार्यों से बचें।

  • वृष राशि के जातक विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि ग्रहों की स्थिति अशुभ प्रभाव दे सकती है।