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“राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन जब बात प्रदेश की हो तो ‘हिमाचल सबसे पहले’ होना चाहिए: आरएस बाली

HPUILS के ‘ENVISION 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे आरएस बाली
कानून की सही समझ, मेहनत और ईमानदारी को बताया सफलता का मूलमंत्र
संविधान, हिमाचली संस्कृति और संघर्ष की ताकत पर छात्रों को दिया प्रेरक संदेश


शिमला के एवा-लॉज स्थित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (HPUILS) में वार्षिक उत्सव ‘ENVISION 2026’ का  आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के अध्यक्ष एवं नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली (रघुवीर सिंह बाली) ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके पहुंचते ही संस्थान परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद संस्थान के मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में आरएस बाली ने आत्मीय अंदाज में छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि सुबह से छात्र अलग-अलग किरदारों और लाइटों में मंच पर प्रस्तुतियां दे रहे थे, लेकिन जब वह यहां पहुंचे तो उन्हें लगा कि वह अपने ही एक परिवार के बीच आए हैं। देश के शीर्ष वकीलों जैसे मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों से कहा कि वकालत के पेशे में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। सिर्फ एक अच्छे केस का अच्छा होमवर्क, उस पर की गई मेहनत और अपने क्लाइंट व अपनी अंतरात्मा (कॉन्शस) के प्रति न्याय करना ही आपको श्रेष्ठ बनाता है। सबसे बड़ी चीज विषय की सही समझ (अन्डरस्टैन्डिंग ऑफ सब्जेक्ट) और कानून की सही व्याख्या (लॉ इंटरप्रिटेशन) है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश के प्रसिद्ध कानूनविद् दिवंगत राम जेठमलानी का एक बेहद प्रेरक संस्मरण भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने जेठमलानी जी के परिवार से यह पूछा कि वह किसी केस को किस नजरिए से देखते थे, तो एक बड़ा सिद्धांत सामने आया। जेठमलानी जी का मानना था कि जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करती, तब तक वह केवल एक केस है, अपराधी नहीं। आरएस बाली ने इसे जीवन का सबसे बड़ा न्यायिक और मानवीय सिद्धांत बताते हुए कहा कि किसी इंसान को उसके कपड़ों, बालों या बाहरी व्यक्तित्व से आंकना गलत है। हर व्यक्ति को समझने और परखने के लिए धैर्य और संवेदनशीलता जरूरी है।

अपने संबोधन में उन्होंने ‘हिमाचल सबसे पहले’ का संदेश भी मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं और वह स्वयं NSUI और यूथ कांग्रेस की पृष्ठभूमि से रहे हैं, लेकिन जब बात प्रदेश के हितों की आती है तो हिमाचल सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की संस्कृति, सभ्यता, प्राकृतिक धरोहर और स्वच्छ वातावरण को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने हिमाचल के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का पहला महावीर चक्र इसी वीरभूमि के हिस्से आया था। आज भी देश के बड़े संस्थानों जैसे एम्स, नीति आयोग और आईआईटी में हिमाचली युवा शीर्ष पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि उन्हें अपनी जड़ों और अपनी मिट्टी पर गर्व होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान जब छात्रों ने स्पॉन्सरशिप को लेकर बात उठाई तो आरएस बाली ने बेहद चतुर और हल्के हास्य अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कानून के छात्र आचार संहिता यानी कोड ऑफ कंडक्ट को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह सीधे तौर पर अभी ऐसा नहीं कर सकते थे, लेकिन आने से पहले ही संबंधित लोगों से छात्रों की बात करवा चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद जो भी जरूरी होगा, वह पूरा किया जाएगा।

छात्रों के बीच उनका यह संवाद पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण बन गया जब उन्होंने कहा, “आपने मेरे कान में कहना है और मैंने आपके कान में ऑपरेट करके चले जाना है।” इस बयान पर पूरा सभागार तालियों और हंसी से गूंज उठा।

अपने भाषण के अंतिम हिस्से में उन्होंने संघर्ष और असफलताओं को जीवन का हिस्सा बताते हुए छात्रों को कभी हार न मानने की सीख दी। उन्होंने अपनी माता जी की सीख साझा करते हुए कहा कि जैसे हर रात के बाद सुबह आती है, वैसे ही कठिन समय भी हमेशा नहीं रहता। उन्होंने छात्रों को सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत का संदेश देते हुए एक प्रेरक शेर सुनाया—

“गम नहीं जो रात है लंबी, मगर आएगा रोशन सवेरा,
आज दिन अपना नहीं है तो क्या, कल दिन तो होगा तेरा-मेरा।”

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आयोजन समिति, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। कार्यक्रम का समापन “विकास पुरुष दिवंगत जीएस बाली अमर रहे” के नारों के साथ हुआ और पूरा सभागार लंबे समय तक तालियों से गूंजता रहा।