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ऊना में बल्क ड्रग पार्क को पर्यावरणीय मंजूरी, 20 हजार रोजगार की उम्मीद

ऊना बल्क ड्रग पार्क को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिली
20,000 तक रोजगार और हजारों करोड़ का निवेश होगा
➤ भारत की फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम


हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क को आखिरकार केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही देश की सबसे अहम फार्मास्युटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक की राह साफ हो गई है। इसका मकसद अन्य देशों से सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक (API) और प्रमुख कच्चे माल (KSM) की निर्भरता को कम करना और भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने मार्च 2020 में बल्क ड्रग पार्क योजना की शुरुआत की थी और जुलाई 2020 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। हिमाचल सरकार ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर इसे प्रस्तुत किया, जिसे अक्तूबर 2022 में संचालन समिति (SSC) से अंतिम स्वीकृति मिली। इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने 996.45 करोड़ रुपये और राज्य सरकार ने 1,074.55 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। इसमें कुल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक का निवेश होने का अनुमान है और 15,000 से 20,000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के तहत कार्यान्वित की जाएगी। परियोजना को लेकर तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एनआईटी हमीरपुर ने निभाई है, जिसमें जल निकासी, भूकंपीय संवेदनशीलता, पर्यावरणीय प्रभाव और जोखिम मूल्यांकन पर खास ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क न केवल हिमाचल प्रदेश को फार्मा हब बनाएगा, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार भी सुनिश्चित करेगा। वहीं, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इसे फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नजीम और निदेशक उद्योग डॉ. यूनुस ने कहा कि यह परियोजना निर्धारित समय में पूरी होगी और वैश्विक मानकों पर खरी उतरेगी।

फार्मा उद्योग जगत ने भी इस मंजूरी का स्वागत किया। फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स के अध्यक्ष बीआर सीकरी, हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता और बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल समेत अन्य उद्योगपतियों ने इसे हिमाचल में फार्मा सेक्टर के नए युग की शुरुआत बताया।

इस परियोजना से न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश को विश्वस्तरीय दवा उत्पादन क्षमता मिलेगी और भारत का फार्मा क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत होगा।