➤ युवाओं को संस्कृति संरक्षण की सबसे अहम जिम्मेदारी
➤ BHU में “भारत विमर्श” कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन
➤ शिक्षा और नशामुक्त भारत को 2047 के विकसित राष्ट्र का आधार बताया
उत्तर प्रदेश के Banaras Hindu University में आयोजित “भारत विमर्श” कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर Kavinder Gupta ने युवाओं को राष्ट्र और संस्कृति के केंद्र में रखते हुए बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति उसकी सांस्कृतिक जड़ों में निहित होती है और इन जड़ों को मजबूत बनाए रखने में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युवा अपनी परंपराओं, मूल्यों और विरासत को समझकर आगे बढ़ेंगे, तो देश का भविष्य स्वतः सशक्त और समृद्ध बनेगा।
राज्यपाल ने काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि Varanasi केवल एक शहर नहीं, बल्कि ज्ञान, साधना और संस्कृति की शाश्वत राजधानी है, जहां से सदियों से पूरे देश को दिशा मिलती रही है। उन्होंने कहा कि “भारत विमर्श” जैसे कार्यक्रम राष्ट्र, समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद का मंच प्रदान करते हैं, जिससे युवाओं में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
यह कार्यक्रम दिवि वेलफेयर फाउंडेशन, काशियाना फाउंडेशन और सामाजिक विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “शिक्षा और नशामुक्त भारत- 2047 के विकसित भारत की ओर” रखा गया, जिसे राज्यपाल ने समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की आधारशिला है।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए उपनिषदों का संदेश “उठो, जागो और श्रेष्ठ लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर आगे बढ़ते रहो” दोहराया और कहा कि यह आज की युवा पीढ़ी के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो लक्ष्य देश के सामने है, उसे हासिल करने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी होगी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित Ajit Chaturvedi ने राज्यपाल का स्वागत किया। इसके अलावा सुमित सिंह, तेज प्रताप सिंह, प्रो. जगदीश राय, सुनील कुमार मिश्रा, आशीष सिंह बघेल और आशीष गुप्ता सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। अंत में डॉ. सचिन मिश्रा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।



