➤ डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया: भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया
➤ ट्रंप के बयान पर अमेरिका-भारत रिश्तों में फिर तल्खी के आसार
➤ भारत ने जवाब में कहा- ऊर्जा जरूरतें बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बड़बोले बयान से भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर हलचल मचा दी है। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, और इसे उन्होंने ‘अच्छा कदम’ करार दिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सिर्फ सुनी हुई जानकारी है और इसकी कोई पुष्टि नहीं है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को लेकर वार्ता चल रही है। एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा था कि भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जो अमेरिका-भारत संबंधों में तल्खी का कारण बन सकता है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। यह अच्छा कदम है। देखते हैं आगे क्या होता है।”
इस बयान से ठीक पहले रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत की चार सरकारी तेल कंपनियों – IOC, BPCL, HPCL और MRPL ने बीते सप्ताह रूस से कच्चे तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है। कारण बताया गया कि अब रूसी तेल पर मिलने वाली छूट कम हो गई है, और कंपनियां अबू धाबी का मुरबान ग्रेड और पश्चिमी अफ्रीका से तेल खरीदने लगी हैं।
हालांकि भारत ने ट्रंप की इस टिप्पणी और अमेरिका के दबाव पर सीधे जवाब देते हुए कहा कि ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति वैश्विक बाजार और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बयान दिया, “हम अपनी ऊर्जा जरूरतें बाजार में उपलब्ध विकल्पों और वैश्विक परिस्थितियों के मुताबिक पूरा करते हैं।”
ट्रंप पहले ही भारत और चीन दोनों पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। उनके अनुसार, जब तक रूस यूक्रेन के साथ बड़ा शांति समझौता नहीं करता, तब तक कोई भी देश अगर रूस से तेल खरीदेगा तो उस पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
भारत बार-बार स्पष्ट कर चुका है कि वह रूस से तेल खरीदने के मामले में किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, और उसकी प्राथमिकता घरेलू ऊर्जा सुरक्षा है, न कि किसी पक्ष विशेष का समर्थन।



