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कला और संस्कृति से साकार होगा विकसित भारत का सपना : राज्यपाल

➤ राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल बोले कला, संस्कृति और स्वदेशी सोच से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प
➤ स्वच्छ भारत से विकसित भारत की यात्रा और ब्रह्मोस मिसाइल का उदाहरण देकर स्वदेशी की ताकत समझाई
➤ एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर कहा- खिलाड़ियों के लिए जीत और आत्मबल ही असली मायने रखते हैं


शिमला। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शिमला में ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित प्रदर्शनी में भाग लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में कला, संस्कृति और स्वदेशी सोच की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि कला केवल मनोरंजन या सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विकसित भारत की परिकल्पना को आम जनमानस तक प्रभावशाली तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में स्वच्छ भारत अभियान से लेकर विकसित भारत संकल्प तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की उपलब्धियों पर नजर गड़ाए हुए है। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब देश स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तब दुनिया की कोई ताकत भारत की बराबरी नहीं कर सकती।

उन्होंने प्रधानमंत्री की मन की बात कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सराहा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत विकसित राष्ट्र बनेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने युवाओं और कलाकारों को प्रेरित करते हुए कहा कि कला समाज का दर्पण है और इसमें राष्ट्र की सोच और दिशा को बदलने की क्षमता है। उन्होंने प्रदर्शनी में लगे चित्रों और कलाकृतियों की सराहना की।

इस अवसर पर मीडिया से बातचीत में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने एशिया कप ट्रॉफी विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खिलाड़ियों के लिए ट्रॉफी का महत्व नहीं, बल्कि आत्मबल, संघर्ष और जीत की भावना ही असली मायने रखती है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और वीर जवानों का पराक्रम ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। पहलगांव में हुए आतंकी हमलों और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे असली जीत बताया।