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हिमाचल की लोक संस्कृति की झलक दिखी पहाड़ी दिवस पर

रामपुर में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस का आयोजन, परंपराओं की गूंज से महका महाविद्यालय परिसर
विधायक नंदलाल ने की अध्यक्षता, दीप प्रज्वलन कर किया शुभारंभ
लोक संस्कृति, नाटी और कवि सम्मेलन ने बाँधा समां, विद्वानों ने हिमाचली धरोहर पर डाली रोशनी


हिमाचल प्रदेश में आज रामपुर के गोविंद बल्लभ पंत राजकीय महाविद्यालय में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस का आयोजन बड़े उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के साथ किया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में परंपरागत लोकगीत, नृत्य, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने हिमाचली अस्मिता को नई पहचान दी।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक एवं 7वें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंदलाल ने की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और कहा कि पहाड़ी दिवस हमारे अस्तित्व, भाषा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ना और स्थानीय भाषाओं व लोक परंपराओं को सहेजना आवश्यक है

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में राजकीय महाविद्यालय रामपुर के छात्र-छात्राओं ने बुशहरी नाटी की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसके बाद डॉ. विजय कुमार स्टोक्स ने “हिमाचल की लुप्त होती सांस्कृतिक विरासत” पर प्रेरक वक्तव्य दिया। उन्होंने लोक बोलियों, लोक संगीत, लोक नृत्य और लोक वाद्य यंत्रों पर विस्तार से चर्चा की। इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध विद्वान डॉ. सूरत ठाकुर ने की, जिन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हिमाचल की लोक संस्कृति को संरक्षित करना हम सबका कर्तव्य है।

द्वितीय सत्र में छात्रों ने कुल्लवी नाटी प्रस्तुत की, जिसके बाद पहाड़ी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए 40 से अधिक कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसमें सुरेंद्र मिन्हास, बाबूराम धीमान, प्रेम पाल आर्य, पल्लवी, हीरालाल ठाकुर, डॉ. राकेश कपूर, कृष्ण चंद्र महादेवीया, विनोद गुलेरिया, जाह्नवी, दीपक शर्मा, रविंद्र साथी, कल्पना गंगटा, उमा ठाकुर, प्रमोद कुमार हर्ष, शिवानी सहित कई अन्य कवियों ने कविता पाठ किया।

इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार शक्ति चंद्र राणा ने की, जिन्होंने पहाड़ी लेखन पर अपने विचार रखते हुए कहा कि पहाड़ी कविता हमारी संवेदनाओं की जड़ है

कार्यक्रम में हिमाचल कला संस्कृति अकादमी की ओर से पुस्तक प्रदर्शनी और राज्य अभिलेखागार की ओर से दुर्लभ ऐतिहासिक अभिलेखों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने दर्शकों का विशेष आकर्षण बना।

कार्यक्रम का प्रथम सत्र श्रीमती कुसुम संघाइक (उपनिदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग) ने संचालित किया, जबकि द्वितीय सत्र का संचालन श्री मदन हिमाचली ने किया।
इस अवसर पर सहायक निदेशक सुरेश राणा, मोहन ठाकुर और सुनीला ठाकुर भी उपस्थित रहे।