➤ सभी को शुद्ध पेयजल और हर खेत तक सिंचाई जल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
➤ जल शक्ति विभाग की 10 हजार योजनाएं प्रदेशभर में क्रियान्वित
➤ दून-नालागढ़ क्षेत्र के लिए ट्यूबवेल व पदों की बड़ी घोषणाएं
सोलन जिला के बद्दी में विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय जल महोत्सव में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का मुख्य लक्ष्य हर घर तक शुद्ध पेयजल और हर खेत तक सिंचाई योग्य जल पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जल शक्ति विभाग निरंतर कार्य कर रहा है और वर्तमान में प्रदेशभर में 10 हजार से अधिक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने दून और नालागढ़ विधानसभा क्षेत्रों के लिए ट्यूबवेल निर्माण व सुदृढ़ीकरण हेतु 2-2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसके अलावा दोनों क्षेत्रों में विभाग के कार्यों को बेहतर बनाने के लिए 50-50 नए पद भरने का आश्वासन भी दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत लगभग 6000 करोड़ रुपए की योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जबकि केंद्र सरकार के पास 1227 करोड़ रुपए लंबित हैं। साथ ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए 2000 करोड़ रुपए की नई योजना तैयार की जा रही है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र में वर्तमान में जल की बढ़ती मांग को देखते हुए करीब 500 ट्यूबवेल स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मियों में जलापूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।

इस मौके पर उन्होंने होम गार्ड वॉलंटियर मैनेजमेंट सिस्टम का जिक्र करते हुए जल संरक्षण और प्रबंधन में जनभागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा, क्योंकि “जल ही जीवन का आधार है।”

कार्यक्रम में जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को ‘नीर नारी सम्मान’ और विभाग के कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही ग्राम पंचायत बसाल और पंजैहरा को जल योजनाओं के सफल संचालन के लिए सम्मानित किया गया।
स्थानीय विधायकों ने भी क्षेत्र में जलापूर्ति, बस सेवा और सड़क परियोजनाओं को लेकर अपनी मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर जल शक्ति विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया गया।



