➤ हिमाचल हाईकोर्ट ने नियमों के बिना हुए डिलिमिटेशन को अवैध करार दिया
➤ 13 फरवरी 2026 के बाद बनी नई पंचायतों पर चुनावी संकट गहराया
➤ पुराने ढांचे के आधार पर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश, 7 अप्रैल तक रोस्टर जारी होगा
शिमला। पंचायत चुनाव से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए डिलिमिटेशन और नई पंचायतों के गठन पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा है कि 13 फरवरी 2026 के बाद जारी किए गए पंचायत गठन, पुनर्गठन और सीमांकन (डिलिमिटेशन) के प्रस्ताव, यदि तय कानून और नियमों के अनुरूप नहीं किए गए हैं, तो उन्हें मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे सभी मामलों में चुनाव पुराने ढांचे और पिछले चुनावों की सीमाओं के आधार पर ही कराए जाएंगे। यह फैसला पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर सीधा असर डालने वाला माना जा रहा है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पंचायतों से जुड़ी प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले सरकार पंचायतों का गठन या पुनर्गठन करती है, उसके बाद संबंधित डीसी द्वारा सीमांकन किया जाता है। इस दौरान नोटिस जारी करना, आपत्तियां और सुझाव लेना तथा उन पर नियमानुसार निर्णय देना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि यदि नियमों में 7 दिन का समय आपत्तियों और सुझावों के लिए निर्धारित है, लेकिन प्रशासन ने केवल 3 से 4 दिन का समय दिया, तो ऐसी प्रक्रिया कानून सम्मत नहीं मानी जाएगी। ऐसे मामलों में नई पंचायतों के आधार पर चुनाव नहीं कराए जा सकेंगे।
कोर्ट ने विशेष रूप से 13 फरवरी 2026 के बाद की गई कार्रवाई पर सख्ती दिखाई है। यह वही समय है जब सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनावों की समयसीमा को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए थे और चुनावों को 31 मई 2026 तक पूरा करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि इस अवधि में की गई किसी भी डिलिमिटेशन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पंचायतों में सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है, वे नई पंचायतें मान्य रहेंगी और उन्हीं के आधार पर चुनाव कराए जा सकते हैं। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि पंचायत चुनाव का आरक्षण रोस्टर 7 अप्रैल 2026 तक जारी किया जाए, ताकि पूरी चुनाव प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी हो सके।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार द्वारा हाल में बनाई गई कई नई पंचायतों पर तलवार लटक गई है। प्रशासन को अब कई क्षेत्रों में पुराने सीमांकन और पिछले चुनावी ढांचे के आधार पर ही चुनाव कराने पड़ सकते हैं। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि पंचायत चुनावों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी, नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया में शॉर्टकट स्वीकार नहीं किया जाएगा।



