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हिमाचल में BDC और जिप चुनाव लड़ने वालों को राहत, आरक्षित वार्ड होने पर दूसरी सीट से भी लड़ सकेंगे चुनाव


➤ BDC और जिला परिषद उम्मीदवार दूसरी सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं
➤ प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्य के लिए यह छूट लागू नहीं
➤ 31 मई से पहले पंचायत चुनाव कराने की तैयारी तेज



हिमाचल प्रदेश में पंचायत समिति सदस्य (BDC) और जिला परिषद (जिप) चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद जिन नेताओं की पारंपरिक सीटें आरक्षित हो गई हैं, उनके लिए अब दूसरी सीट से चुनाव लड़ने का रास्ता खुला हुआ है।

नियमों के अनुसार, जिला परिषद का उम्मीदवार जिले के किसी भी जिप वार्ड से चुनाव लड़ सकता है, जबकि BDC उम्मीदवार संबंधित ब्लॉक के किसी भी वार्ड से मैदान में उतर सकता है। इसका मतलब है कि यदि किसी दावेदार का वार्ड महिला, अनुसूचित जाति या अन्य श्रेणी के लिए आरक्षित हो जाता है, तो वह उसी जिले या ब्लॉक के दूसरे वार्ड से नामांकन कर सकता है। यह प्रावधान चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

हालांकि यह सुविधा सभी पदों पर लागू नहीं है। प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्य केवल अपनी ही पंचायत या वार्ड से चुनाव लड़ सकते हैं। पंचायतीराज अधिनियम में इन पदों को स्थानीय स्तर तक सीमित रखा गया है, इसलिए इनके लिए दूसरी पंचायत से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।

दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को दो जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली, उम्मीदवार का नाम संबंधित मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। दूसरी, जिस वार्ड से चुनाव लड़ना है वहां नामांकन के समय एक प्रस्तावक (प्रोपोजर) का होना अनिवार्य है। इन शर्तों के बिना नामांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद प्रदेश में सियासी समीकरण तेजी से बदल गए हैं। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण और अन्य आरक्षित वर्गों की सीटों को मिलाकर करीब 55 प्रतिशत सीटें रिजर्व हो चुकी हैं। इससे कई संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक गणित प्रभावित हुई है और अब वे दूसरी सीटों पर विकल्प तलाश रहे हैं।

कई क्षेत्रों में “प्रॉक्सी उम्मीदवार” का ट्रेंड भी तेजी से उभर रहा है। जिन पुरुष नेताओं की सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गई है, वे अब अपनी पत्नी या परिवार की अन्य महिला सदस्य को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही कई नेता ब्लॉक या जिले के दूसरे वार्डों में भी अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

पंचायतीराज एक्ट के मुताबिक, शहरी निकायों (नगर निगम/नगर परिषद) के मतदाता जिला परिषद या BDC चुनाव नहीं लड़ सकते। यानी पात्रता केवल ग्रामीण निकाय मतदाता सूची से ही तय होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रदेश की 3755 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने आरक्षण रोस्टर में डीसी को दिए गए 5 प्रतिशत बदलाव के अधिकार को भी रद्द कर दिया है, जिसके बाद चुनावी प्रक्रिया और तेज हो गई है।