➤ स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच शिमला में सफाई कर्मियों की हड़ताल की चेतावनी
➤ वेतन वृद्धि रोकने से नाराज कर्मचारी कल से जाएंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
➤ नगर निगम कमिश्नर बोले- हड़ताल हुई तो ESMA के तहत होगी कार्रवाई
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सफाई कर्मियों ने लंबित मांगों और वेतन बढ़ोतरी को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। इससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने और स्वच्छता रैंकिंग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी और सभी कर्मचारियों के लिए समान कानून लागू करने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि हाल ही में सात साल बाद आयोजित हुई एजीएम में ऐसे फैसले लिए गए, जो कर्मचारियों के हित में नहीं हैं।
सैहब सोसाइटी कर्मचारी यूनियन के उपाध्यक्ष अमित भाटिया ने कहा कि कर्मचारियों को हर साल मिलने वाली 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि इस बार रोक दी गई है। यूनियन की मांग है कि मई महीने की सैलरी के साथ यह इन्क्रीमेंट बहाल किया जाए। इसके अलावा सभी कर्मचारियों पर समान नियम लागू करने की मांग भी उठाई गई है।
उन्होंने प्रशासन की ओर से ESMA लगाने और कार्रवाई की चेतावनी पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कर्मचारी पिछले 18 वर्षों से शिमला शहर को स्वच्छ रखने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें डराया और दबाया जा रहा है। यूनियन ने साफ कहा है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी भूख हड़ताल तक का रास्ता अपना सकते हैं।
वहीं नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने हड़ताल के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान हड़ताल पर जाना उचित नहीं है और इससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
कमिश्नर ने कहा कि यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो प्रशासन ESMA के तहत कार्रवाई करेगा। अदालत के आदेशों के तहत शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में सफाई व्यवस्था बाधित नहीं होने दी जाएगी।



