➤ चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को केंद्र से जल्द मिल सकती है मंजूरी
➤ लाहौल में 8.7 किमी लंबी सुरंग से चंद्रा नदी का पानी ब्यास बेसिन में मोड़ने की तैयारी
➤ परियोजना से हिमाचल में 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावना
हिमाचल प्रदेश के लाहौल क्षेत्र में प्रस्तावित बहुचर्चित चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर जल्द काम शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद यह केंद्र सरकार का एक बड़ा और रणनीतिक कदम हो सकता है। नई दिल्ली में इस परियोजना को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं और आधिकारिक मंजूरी की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।
प्रस्तावित योजना के तहत लाहौल के कोकसर क्षेत्र में पीर पंजाल पर्वत के नीचे लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इस सुरंग परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2352 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अतिरिक्त गाद प्रबंधन प्रणाली और अन्य तकनीकी ढांचे पर लगभग 2600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
परियोजना के तहत चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाने की भी योजना तैयार की गई है। इस बैराज के माध्यम से नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित कर सुरंग नेटवर्क के जरिए ब्यास बेसिन की ओर मोड़ा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के जल और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
सूत्रों के अनुसार यह योजना केवल जल मोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए प्रदेश में जलविद्युत उत्पादन क्षमता को भी बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश में करीब 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावनाएं पैदा होंगी। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिल सकती है।
यह परियोजना वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों के जल उपयोग की अनुमति से जुड़ी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना धरातल पर उतरती है तो इसका असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल प्रबंधन, सिंचाई और भविष्य की जल जरूरतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि पर्यावरणीय प्रभाव और पहाड़ी भूगोल को देखते हुए विस्तृत अध्ययन और तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है।
इस मुद्दे पर हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट हिमाचल सहित पूरे उत्तर भारत के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश को जल और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद सरकार का यह कदम राष्ट्रीय हितों को और मजबूत करेगा।



