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खालसा टैक्स विवाद पर सीएम सुक्खू ने भगवंत मान से की बात, जानें

हिमाचल सीमा पर खालसा टैक्स विवाद को लेकर सीएम सुक्खू ने पंजाब सीएम से बात की
पंजाब में हिमाचल की गाड़ियों से कथित खालसा टैक्स वसूली पर उचित कार्रवाई की मांग
पूर्व कांग्रेस विधायक नीरज भारती ने निहंगों के विरोध का समर्थन किया


हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच उभरे खालसा टैक्स विवाद ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से बातचीत की है। राज्य सरकार ने पंजाब में हिमाचल नंबर की गाड़ियों से कथित तौर पर वसूले गए खालसा टैक्स को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने पंजाब सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है और इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल और पंजाब के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं और इस तरह की घटनाएं दोनों राज्यों के लोगों के बीच गलत संदेश भेज सकती हैं।

दरअसल, बुधवार को पंजाब के कीरतपुर क्षेत्र में कुछ निहंग समूहों द्वारा हिमाचल प्रदेश की गाड़ियों को रोककर कथित तौर पर खालसा टैक्स वसूला गया। यह कार्रवाई हिमाचल सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के व्यावसायिक वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स के विरोध में की गई। निहंगों का कहना था कि यदि हिमाचल सरकार एंट्री टैक्स ले सकती है तो पंजाब में भी इसी तरह की वसूली की जा सकती है।

जानकारी के अनुसार सुबह करीब 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक हिमाचल नंबर की कई गाड़ियों को रोककर उनसे धनराशि ली गई। बाद में पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप और समझाइश के बाद यह वसूली बंद कर दी गई। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी रहीं।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि यह अकाली दल और भाजपा की सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि हर बार पर्यटन सीजन शुरू होते ही हिमाचल को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की जाती है। नेगी ने कहा कि खालसा टैक्स जैसी वसूली पूरी तरह गैरकानूनी है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वहीं दूसरी ओर, कांगड़ा जिले के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस विधायक नीरज भारती ने इस मामले में अलग राय रखते हुए निहंगों के विरोध का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि हिमाचल सरकार को राजस्व की आवश्यकता है तो राज्य की जनता से सहयोग मांगा जाना चाहिए, न कि बाहर से आने वाले लोगों को एंट्री टैक्स के माध्यम से परेशान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम भविष्य में दूसरे राज्यों में हिमाचल के लोगों के प्रति भी नकारात्मक माहौल पैदा कर सकते हैं।

यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। एक ओर राज्य सरकार इसे कानून व्यवस्था और अंतरराज्यीय सौहार्द से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं दूसरी ओर एंट्री टैक्स नीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आने वाले दिनों में पंजाब सरकार और हिमाचल सरकार के बीच इस विषय पर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।