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कार्ड है, इलाज नहीं… ये कैसी सरकारी राहत?

➤ कैंसर अस्पताल में दवाइयों की कमी से मरीज परेशान, इलाज पर संकट
➤ आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड के बावजूद बाहर से खरीदनी पड़ रहीं महंगी दवाइयां
➤ दूर-दराज से आए मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर


शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी में स्थित कैंसर अस्पताल में दवाइयों की कमी ने मरीजों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कीमोथेरेपी इंजेक्शन से लेकर कई जरूरी दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

एक ओर सरकार हिमकेयर और आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज के दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। मरीजों का कहना है कि कार्ड होने के बावजूद उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे इलाज अधूरा रह जाने का खतरा बढ़ गया है।

मरीजों ने बताया कि पहले अधिकांश इलाज कार्ड पर हो जाता था, लेकिन अब आधी से ज्यादा दवाइयां अस्पताल में नहीं मिल रहीं। कई लोग दूर-दराज क्षेत्रों से कर्ज लेकर इलाज के लिए आते हैं, लेकिन दवाइयों के अभाव में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने भी गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि कार्ड पर इलाज संभव नहीं है, तो ऐसी योजनाओं का कोई फायदा नहीं। कई परिवार इलाज के लिए कर्ज लेने या संपत्ति बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

जन औषधि केंद्रों पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। यहां दवाइयों की सप्लाई प्रभावित होने का कारण पेमेंट में देरी और लंबित ऑर्डर बताया जा रहा है।

वहीं, अस्पताल प्रशासन ने दवाइयों की कमी स्वीकार करते हुए कहा कि सप्लाई में देरी और कुछ दवाओं की अनुपलब्धता के कारण दिक्कतें आई हैं। प्रशासन ने जल्द स्थिति सुधारने का आश्वासन दिया है।

मरीजों का साफ कहना है कि यदि समय पर दवाइयां उपलब्ध नहीं करवाई जा सकतीं, तो योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जिससे उनका भरोसा टूट रहा है।