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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 7 अप्रैल तक जारी होगा पंचायत रोस्टर

हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार को 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर जारी करने के सख्त निर्देश दिए
13 फरवरी के बाद बनी नई पंचायतों के गठन और डिलिमिटेशन पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
नियमों का पालन नहीं होने पर चुनाव पुराने ढांचे के आधार पर कराने के संकेत



शिमला। पंचायती राज चुनावों से पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए अहम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि 7 अप्रैल 2026 तक आरक्षण रोस्टर हर हाल में जारी किया जाए और पूरी चुनाव प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद चुनावी तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव 31 मई 2026 तक कराने की समयसीमा तय कर चुका है।

महिला मंडल उमरी समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पंचायतों के गठन, पुनर्गठन और सीमांकन (डिलिमिटेशन) की पूरी प्रक्रिया कानून और तय नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि सीमांकन निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया है, तो उसे अवैध माना जाएगा और आने वाले चुनावों में लागू नहीं किया जा सकेगा।

अदालत ने विशेष रूप से 13 फरवरी 2026 के बाद बनाई गई नई पंचायतों पर सख्त रुख अपनाया है। इस तारीख के बाद कई नई पंचायतों के गठन और सीमांकन की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन कई मामलों में नोटिस जारी करने, आपत्तियां मांगने और उन पर निर्णय लेने जैसी आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन पंचायतों के आधार पर चुनाव कराना उचित नहीं होगा।

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले सरकार पंचायतों का गठन या पुनर्गठन करती है और उसके बाद संबंधित उपायुक्त (DC) क्षेत्रों का सीमांकन करता है। इस दौरान सार्वजनिक नोटिस, आपत्तियां और सुझाव लेना तथा उन पर फैसला करना अनिवार्य होता है। यदि इन नियमों की अनदेखी की गई है, तो पूरी प्रक्रिया अमान्य मानी जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जहां सभी नियमों का सही तरीके से पालन किया गया है, केवल वही पंचायतें और उनका सीमांकन मान्य रहेगा और उन्हीं के आधार पर चुनाव कराए जा सकेंगे। वहीं जिन पंचायतों में प्रक्रिया अधूरी या जल्दबाजी में पूरी की गई है, वहां चुनाव पुराने ढांचे के आधार पर कराए जा सकते हैं।

इस फैसले के बाद 13 फरवरी के बाद गठित कई नई पंचायतों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं और कई क्षेत्रों में चुनाव लटकने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों के गठन, विभाजन और सीमांकन की वैधता से जुड़े बाकी मुद्दों पर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। इन मामलों को आगे की सुनवाई के लिए खुला रखा गया है, ताकि याचिकाकर्ता आवश्यकता पड़ने पर नई याचिका दायर कर सकें।