➤ सोलन में 37, सिरमौर में 11, ऊना-कांगड़ा में 1-1 सैंपल मानकों पर फेल
➤ बीपी, अल्सर, एंटीबायोटिक, एलर्जी, खांसी, एसिडिटी और खून पतला करने की दवाएं शामिल
➤ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई, बाजार से स्टॉक वापस मंगवाया जाएगा
हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रदेश में बनी 50 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं, जबकि देशभर में कुल 167 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
जिला स्तर पर देखें तो सोलन में 37, सिरमौर में 11 और ऊना व कांगड़ा में एक-एक दवा कंपनी के सैंपल फेल हुए हैं। इन दवाओं में बैक्टीरियल संक्रमण, उच्च रक्तचाप (BP), अल्सर, एंटीबायोटिक, एलर्जी, खांसी, एसिडिटी, खून पतला करने और खून के थक्के रोकने से जुड़ी दवाएं शामिल हैं।
राज्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट में देशभर के 93 सैंपल फेल पाए गए, जिनमें हिमाचल के 31 थे। वहीं सीडीएसओ की जांच में देशभर के 74 सैंपल फेल हुए, जिनमें हिमाचल के 19 सैंपल शामिल हैं।
कई दवा कंपनियों—जैसे थियोन फार्मा, माया बायोटेक, जी लेबोट्री, क्रस्ट लाइफ साइंस, मार्टिन एंड ब्राउन, अलोप मेडी साइंस, हिल्लर लैब, अल्ट्रा ड्रग—की दवाएं मानकों पर सही नहीं पाई गईं। सूची में एलर्जी, बीपी, एंटीबायोटिक, अस्थमा, खांसी, उल्टी, फंगल इंफेक्शन, कोलेस्ट्रोल, पेरासिटामोल, कैल्शियम-विटामिन और क्लोपिडोग्रेल जैसी दवाएं शामिल हैं।
राज्य औषधि नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि संबंधित कंपनियों के खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। बाजार में उपलब्ध स्टॉक को तुरंत वापस मंगवाया जाएगा और कंपनियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। विभाग दोबारा सैंपल जांच भी करेगा।



