➤ हिमाचल निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में कई जगह कांग्रेस की दमदार वापसी, तो कई क्षेत्रों में भाजपा ने बचाई पकड़
➤ कांगड़ा, देहरा और चौपाल में कांग्रेस को बड़ी बढ़त, मनाली, रामपुर और ऊना के कई निकायों में भाजपा का दबदबा
➤ निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा, परिणामों से प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल
Himachal Pradesh में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति का पूरा माहौल बदल दिया है। 51 शहरी निकायों में हुए चुनावों के परिणाम रविवार देर शाम तक सामने आते रहे, जिनमें कई जगह कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया तो कई निकायों में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने अपना दबदबा कायम रखा। इन चुनावों को 2027 विधानसभा चुनावों से पहले सबसे बड़े राजनीतिक टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। परिणामों के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में जश्न और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
प्रदेश के कई जिलों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। चुनाव आयोग और प्रशासन ने अधिकांश क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया है। हालांकि कुछ जगहों पर राजनीतिक तनातनी और बहस के वीडियो भी सामने आए, जिन्होंने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया। राजनीतिक जानकार इन नतीजों को आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला मान रहे हैं।
कांगड़ा में कांग्रेस का क्लीन स्वीप
कांगड़ा नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने सभी 9 वार्डों में जीत दर्ज कर भाजपा का पूरी तरह सूपड़ा साफ कर दिया। वार्ड नंबर-1 से भावना, वार्ड नंबर-2 से सुमन वर्मा, वार्ड नंबर-3 से नीलू, वार्ड नंबर-4 से मोना, वार्ड नंबर-5 से शुभम, वार्ड नंबर-6 से राजकुमारी, वार्ड नंबर-7 से कोमल शर्मा, वार्ड नंबर-8 से शुभम और वार्ड नंबर-9 से अशोक शर्मा विजयी रहे। कांग्रेस की इस एकतरफा जीत को जिला कांगड़ा की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में सातवीं बार पार्षद चुनी गईं और पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं सुमन वर्मा के अध्यक्ष बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यसभा सांसद और जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने इसे जनता के विश्वास और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की नीतियों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ निकाय चुनाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल है।
देहरा में 15 साल बाद कांग्रेस की वापसी
देहरा नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस ने 15 साल बाद जोरदार वापसी की है। सात वार्डों में से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की जबकि भाजपा केवल दो सीटों पर सिमट गई। वार्ड नंबर-1 से निष्ठा चंबियाल, वार्ड नंबर-2 से मलकीयत परमार, वार्ड नंबर-3 से नरेश कुमार, वार्ड नंबर-4 से उपासना सूद, वार्ड नंबर-5 से किरण देवी, वार्ड नंबर-6 से पारस और वार्ड नंबर-7 से किरण शर्मा विजयी रहे।
विधायक कमलेश ठाकुर ने जनता का आभार जताते हुए कहा कि लोगों ने विकास कार्यों और सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
रामपुर में भाजपा ने बदला इतिहास
रामपुर में इस बार भाजपा ने कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे गढ़ में सेंध लगाकर बड़ा उलटफेर कर दिया। भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने 9 में से 5 सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर-2 से रोहित नेगी, वार्ड नंबर-5 से नितिका गुप्ता, वार्ड नंबर-6 से उमा देवी, वार्ड नंबर-7 से सुंदर लाल और वार्ड नंबर-8 से चंद्रप्रभा विजयी रहे। कांग्रेस समर्थित दीपना नेगी, जय श्री और करण शर्मा ने भी कुछ वार्डों में जीत दर्ज की।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने जीत के बाद जोरदार जश्न मनाया और इसे कांग्रेस के गढ़ में ऐतिहासिक सेंध बताया। भाजपा नेता कौल सिंह नेगी की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई।
मनाली में भाजपा का क्लीन स्वीप
मनाली नगर परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने सभी सात सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस का पूरी तरह सफाया कर दिया। मनाली में भाजपा की इस बड़ी जीत को पार्टी के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
वहीं कुल्लू नगर परिषद में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। यहां कांग्रेस और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को तीन-तीन सीटें मिलीं जबकि पांच सीटों पर अन्य उम्मीदवार विजयी रहे। नगर परिषद कुल्लू के वार्ड नंबर-2 में कुब्जा ठाकुर ने सिर्फ एक वोट से जीत दर्ज की। इस सीट पर नोटा ने भी बड़ा रोल निभाया।
ऊना जिले में भाजपा का दबदबा
ऊना जिले के कई निकायों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया। नगर परिषद संतोषगढ़ में भाजपा ने 6 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं। नगर पंचायत गगरेट में भाजपा ने 6 सीटों पर कब्जा किया। नगर पंचायत अंब में भाजपा को 4, कांग्रेस को 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिलीं।
हालांकि नगर पंचायत दौलतपुर चौक में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटें जीत लीं जबकि भाजपा केवल 2 सीटों तक सीमित रही। नगर पंचायत टाहलीवाल में भाजपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की।
चौपाल और निरमंड में कांग्रेस की बढ़त
चौपाल नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने सात में से पांच वार्डों में जीत दर्ज की जबकि भाजपा को दो सीटें मिलीं। वहीं निरमंड नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने पांच सीटों पर जीत हासिल की।
इसके विपरीत कोटखाई नगर पंचायत में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने पांच सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। भाजपा नेता चेतन बरागटा भी विजयी प्रत्याशियों के साथ जश्न में शामिल हुए।
जोगिंद्रनगर में दिग्गजों की हार
जोगिंद्रनगर नगर परिषद चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। दो पूर्व अध्यक्ष, एक पूर्व उपाध्यक्ष और कई पूर्व पार्षद चुनाव हार गए। वार्ड नंबर-1 से तीन बार अध्यक्ष रह चुकीं ममता कपूर हार गईं जबकि प्यार चंद विजयी रहे। पूर्व अध्यक्ष प्रेरणा ज्योति, पूर्व उपाध्यक्ष अजय धरवाल और पूर्व अध्यक्ष राजीव कुमार को भी हार का सामना करना पड़ा।
कई वार्डों में नए चेहरों ने जीत दर्ज कर स्थानीय राजनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे जनता की नई सोच और बदलाव की मांग से जोड़कर देख रहे हैं।
सुजानपुर और तलाई में मिला-जुला जनादेश
सुजानपुर नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ दिया। वार्ड नंबर-1 से भाजपा समर्थित बलविंदर, वार्ड नंबर-2 से निर्दलीय मनीष गुप्ता और वार्ड नंबर-3 से कांग्रेस समर्थित ज्योतिका ठाकुर विजयी रहीं।
तलाई नगर पंचायत में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया जबकि कांग्रेस को दो सीटों पर संतोष करना पड़ा।
चुनाव के दौरान विवाद भी सामने आए
निकाय चुनावों के दौरान कुछ जगहों पर विवाद भी देखने को मिले। सतपाल सत्ती और एक व्यक्ति के बीच पोलिंग बूथ के अंदर हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बताया गया कि विधायक समर्थकों के बूथ में प्रवेश को लेकर विवाद हुआ था। कुछ देर के लिए चुनावी माहौल गर्मा गया, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर नजर
निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद अब सभी की नजर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव पर टिक गई है। कई नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ शुरू हो चुकी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने-अपने समर्थित पार्षदों को एकजुट रखने में जुट गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन निकाय चुनावों ने साफ कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई जारी है। कई क्षेत्रों में कांग्रेस ने मजबूत वापसी की है, जबकि भाजपा अपने पारंपरिक क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखने में सफल रही है। आने वाले दिनों में इन परिणामों का असर प्रदेश की बड़ी राजनीति में भी दिखाई देने की संभावना है।



