- सील्ड रोड विवाद पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद वकीलों ने समाप्त किया प्रदर्शन
- सचिवालय के बाहर चक्का जाम और जोरदार नारेबाजी से कई घंटे प्रभावित रहा यातायात
- विवाद के बीच मंत्री विक्रमादित्य सिंह की गाड़ी सहित कई वाहनों के चालान चर्चा का विषय बने
राजधानी शिमला में प्रतिबंधित और सील्ड सड़कों पर लागू नियमों को लेकर अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद मंगलवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब सैकड़ों वकील मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग को लेकर सचिवालय के बाहर एकत्रित हो गए। अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं आकर उनकी बात नहीं सुनते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सुबह ओक ओवर से सचिवालय तक रोष रैली निकालने के बाद अधिवक्ताओं ने सचिवालय परिसर के बाहर धरना-जैसी स्थिति बना दी और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सील्ड रोड संबंधी नियमों और बढ़ी हुई परमिट फीस से उनके दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा प्रशासन उनकी व्यावहारिक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।

प्रदर्शन के कारण सचिवालय और छोटा शिमला क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी।

हालांकि बाद में मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई, जिसके बाद अधिवक्ताओं ने अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इससे शहर में यातायात व्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।
मंत्री विक्रमादित्य सिंह की गाड़ी का भी कटा चालान
प्रदर्शन के दौरान एक और मामला चर्चा में आ गया। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सरकारी गाड़ी का सील्ड रोड पर प्रवेश करने के कारण चालान काटा गया। जानकारी के अनुसार उस समय वाहन में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी मौजूद थीं।
पुलिस ने शिल्ली चौक के पास वाहन को रोककर नियमों के उल्लंघन पर 1500 रुपये का चालान किया। बताया जा रहा है कि एसडीएम ओशीन शर्मा और एक डीआईजी रैंक के अधिकारी के वाहन पर भी कार्रवाई की गई।
अधिवक्ताओं ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यदि नियम बनाए गए हैं तो उनका पालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो, अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि।
क्या है पूरा विवाद?
हिमाचल सरकार ने हाल ही में शिमला की सील्ड सड़कों पर वाहनों के प्रवेश के लिए परमिट शुल्क में कई गुना वृद्धि की है। वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट और न्यायालयों तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना इन मार्गों का उपयोग करना पड़ता है। ऐसे में नई व्यवस्था उनके पेशेवर कार्यों में बाधा पैदा कर रही है।
अधिवक्ताओं की मांग है कि उनके लिए पहले की तरह व्यावहारिक और सुविधाजनक व्यवस्था बहाल की जाए तथा नियमों के क्रियान्वयन में समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
स्कूली बच्चे और आम लोग जाम में फंसे
धरने के कारण शहर में कई स्थानों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। दोपहर के समय स्कूलों की छुट्टी होने के चलते बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी जाम में फंस गए। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, मरीजों और आम यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
क्या है पूरा विवाद?
हिमाचल सरकार ने हाल ही में बजट सत्र के दौरान शिमला की सील्ड रोड पर वाहनों के प्रवेश से जुड़ी परमिट फीस में कई गुना वृद्धि की है।
- वार्षिक परमिट शुल्क 2500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया।
- दैनिक परमिट शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये किया गया।
- प्रोसेसिंग फीस 100 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई।
- बिना परमिट वाहन पकड़े जाने पर 10,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
चूंकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट परिसर सील्ड रोड से जुड़ा हुआ है, इसलिए वकीलों का कहना है कि नई व्यवस्था उनके कामकाज को प्रभावित करेगी। अधिवक्ताओं की मांग है कि पहले की तरह उन्हें विशेष अनुमति और पुरानी व्यवस्था के तहत राहत दी जाए।




