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हिमाचल के सरकारी स्कूलों को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाएगी सरकार: सुक्खू

मुख्यमंत्री सुक्खू बोले, हिमाचल के सरकारी स्कूलों को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाया जाएगा

छोटा शिमला सीबीएसई स्कूल में विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद

एंटी-चिट्टा अभियान में युवाओं की भूमिका को मुख्यमंत्री ने बताया बेहद अहम


मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नव स्तरोन्नत सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छोटा शिमला में विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्रों के सवालों के जवाब बेहद सहज और आत्मीय अंदाज में दिए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था, करियर, खेल, राजनीति और नशा-निवारण जैसे कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं और इनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि वह यहां भाषण देने नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याएं और सुझाव सुनने आए हैं, ताकि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर किया जा सके। मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से होती है और वे बेहद मेहनती व सक्षम होते हैं।

संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके निजी जीवन और छात्र जीवन से जुड़े सवाल भी पूछे। छात्र आरव ठाकुर ने मुख्यमंत्री से उनके पसंदीदा खेल के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह स्कूल और कॉलेज के दिनों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में सक्रिय रहते थे और हॉकी, क्रिकेट तथा हैंडबॉल खेलते थे। उन्होंने कहा कि वह हैंडबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्हें ट्रैकिंग का भी काफी शौक रहा है और उनकी पहली ट्रैकिंग यात्रा टापरी से रिकांगपिओ तक की थी।

कार्यक्रम के दौरान स्कूल के विद्यार्थियों ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। एक छात्र ने बताया कि स्कूल में भौतिकी विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं हैं और राजनीति विज्ञान के लिए केवल एक शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यार्थियों ने खाली पद जल्द भरने की मांग की।

इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह स्कूल सीबीएसई संस्थान बन चुका है और 30 जून से पहले सभी रिक्त पदों को भर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अब सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अधिक विषयों का विकल्प भी मिलेगा।

कक्षा 12 के छात्र दिव्यांश ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आज के समय में अंक ज्यादा महत्वपूर्ण हैं या कौशल। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे अंक जरूरी हैं, लेकिन विद्यार्थियों को कुशल और सक्षम व्यक्ति बनना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के एंटी-चिट्टा अभियान को लेकर भी विद्यार्थियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं की भूमिका इस अभियान में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशा तस्कर पहले युवाओं को नशे का आदी बनाते हैं और बाद में उन्हें तस्करी में शामिल कर लेते हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे नशा तस्करों की जानकारी पुलिस को दें और समाज में जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि 5 जून को शिमला में एंटी-चिट्टा रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें विद्यार्थियों से बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान कक्षा 7 की छात्रा राधा ने मुख्यमंत्री से उनकी राजनीतिक यात्रा के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 17 वर्ष की उम्र में कक्षा प्रतिनिधि बने थे और बाद में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई के दौरान विभागीय प्रतिनिधि चुने गए। इसके बाद उन्होंने नगर निगम शिमला में पार्षद, एनएसयूआई और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके माता-पिता उन्हें राजनीति छोड़कर नौकरी करने की सलाह देते थे, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन, समर्पण और लगातार मेहनत करने वाला व्यक्ति ही सफलता हासिल करता है।