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23 अप्रैल को गलती से सीमा पार कर गए थे BSF कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ, पाकिस्तानी रेंजर्स ने लिया था हिरासत में
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DGMO स्तर की बातचीत और 3 फ्लैग मीटिंग के बाद रिहाई, बुधवार सुबह अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत लौटे
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पत्नी रजनी शॉ बोलीं – मोदी हैं तो मुमकिन है, ममता बनर्जी ने भी भरोसा दिलाया था
India Pakistan Border: बीएसएफ कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ, जो 23 अप्रैल को फिरोजपुर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे, उन्हें 20 दिन बाद पाकिस्तान ने भारत को लौटा दिया है। बुधवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे वे अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए वतन लौटे। वापसी के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया है। पूछताछ के बाद उन्हें घर भेजा जाएगा।
BSF द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि शॉ 23 अप्रैल को खेतों की निगरानी में लगे थे, जब तबीयत बिगड़ने पर पेड़ के नीचे बैठने गए और अनजाने में सीमा पार कर गए। उसी समय पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें घेर लिया और बंदी बना लिया। जवान की राइफल, बैग और पानी की बोतल को भी जब्त कर लिया गया था। बाद में पाकिस्तान ने जवान की दो तस्वीरें जारी की थीं – एक में वह आंखों पर पट्टी बांधे दिखे, और दूसरी में उनका सामान ज़मीन पर पड़ा था।

जवान की रिहाई के लिए 3 फ्लैग मीटिंग हुईं, लेकिन पहले कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरकार DGMO स्तर पर बातचीत के बाद पाकिस्तान ने उन्हें रिहा कर भारत को सौंप दिया। इससे पहले BSF जवान की गर्भवती पत्नी रजनी शॉ, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिसड़ा गांव से हैं, ने भी फिरोजपुर आकर बीएसएफ अधिकारियों से मुलाकात की थी।
जवान की रिहाई पर रजनी शॉ ने कहा – “मेरे पति बिल्कुल फिट हैं। आज बहुत खुशी है। BSF के CO साहब का सुबह फोन आया था कि PK साहब लौट आए हैं। उन्होंने मुझे वीडियो कॉल भी किया।” उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए कहा, “मोदी जी हैं तो मुमकिन है। 22 अप्रैल को पहलगाम में अटैक हुआ और 15-16 दिन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए बदला लिया गया। फिर मेरे पति को भी सुरक्षित वापस लाया गया।”
रजनी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी ने 3-4 दिन पहले उन्हें कॉल किया था और भरोसा दिलाया था कि उनके पति जल्द घर लौट आएंगे।
BSF ने पुष्टि की है कि जवान की मेडिकल जांच और जरूरी पूछताछ के बाद उन्हें छुट्टी पर भेजा जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर जवान की रिहाई को राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों की सफलता माना जा रहा है।



