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लाहौल के खेतों में अब बदली बयार, आलू छोड़ बढ़ी सब्ज़ियों की बहार

  • लाहौल में किसानों के लिए इनपुट वितरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

  • डॉक्टर बृजेश सिंह, विनोद, आलोक कुमार और डॉ. राधिका नेगी ने किसानों को तकनीकी जानकारी दी

  • आलू उत्पादन घटा, आइसबर्ग, ब्रोकली, लिपी व फूलगोभी की खेती में किसानों की बढ़ती रुचि


Lahaul Potato Cultivation Decline: जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के कुकुमसेरी क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला और चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किसान मेला व इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस विशेष आयोजन में लाहौल-स्पीति की 10 पंचायतों से लगभग 300 किसान महिलाएं और पुरुष शामिल हुए, जिन्हें उनकी ग्राम पंचायतों के प्रधानों द्वारा नामित किया गया था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला की निदेशक डॉ. बृजेश सिंह रहीं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए स्वस्थ बीज आलू उत्पादन, केंद्र की अनुसंधान गतिविधियाँ, और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में फसल सुधार एवं बीज तकनीकी प्रभारी डॉ. विनोद ने बीज उपचार, रोग व कीट प्रबंधन संबंधी अहम जानकारियाँ साझा कीं। वहीं सामाजिक विज्ञान प्रभारी डॉ. आलोक कुमार ने आलू की विभिन्न प्रजातियों, उन पर चल रहे शोध और अन्य प्रसार कार्यक्रमों की जानकारी दी।

कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. राधिका नेगी ने बेमौसमी सब्जियों की खेती, उनकी तकनीक, और उच्च उत्पादकता के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लाहौल घाटी में अब आलू की खेती घट रही है, जबकि किसान अब आइसबर्ग, ब्रोकली, लिपी और फूलगोभी की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लाहौल घाटी कभी आलू बीज उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध थी और यहां के आलू पूरे हिमाचल प्रदेश में बीज के रूप में उपयोग किए जाते थे, लेकिन अब खेती के रुझान बदल रहे हैं।